मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने धार भोजशाला मामले में शुक्रवार को फैसला आ गया है। हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह परिसर हिंदू मंदिर है। हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष की मांग पर दायर याचिका पर फैसला सुनाया है। सामने आया है कि हाईकोर्ट ने कहा कि भोजशाला का मूल स्वरूप संस्कृत शिक्षा केंद्र का था।
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने धार भोजशाला मामले में शुक्रवार को फैसला आ गया है। हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह परिसर हिंदू मंदिर है। हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष की मांग पर दायर याचिका पर फैसला सुनाया है। सामने आया है कि हाईकोर्ट ने कहा कि भोजशाला का मूल स्वरूप संस्कृत शिक्षा केंद्र का था। अदालत ने ASI सर्वे और वैज्ञानिक अध्ययन पर भरोसा जताते हुए कहा कि पुरातत्व एक विज्ञान है और कोर्ट वैज्ञानिक निष्कर्षों पर भरोसा कर सकती है।
कोर्ट ने कहा कि सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व वाली संरचनाओं का संरक्षण करे। अदालत ने यह भी कहा कि श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाएं, कानून-व्यवस्था और संरक्षण सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व है। मुस्लिम पक्ष को नमाज के लिए धार जिले में अलग जमीन के लिए सरकार से संपर्क करने की छूट दी गई है। कोर्ट ने केंद्र सरकार और ASI को भोजशाला परिसर के प्रबंधन और संस्कृत शिक्षा से जुड़े फैसले लेने को कहा है। ASI परिसर का समग्र प्रशासन और प्रबंधन जारी रखेगा।
हिंदू समुदाय भोजशाला को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर मानता है, जबकि मुसलमान इसे कमाल मौला मस्जिद कहते हैं। जुलाई 2024 में ASI ने विवादित भोजशाला-कमाल-मौला मस्जिद परिसर (Bhojshala-Kamal Maula Mosque Complex) की अपनी वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की इंदौर बेंच में जमा की थी। बता दें कि पिछले कई सालों से चली आ रही एक व्यवस्था के अनुसार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इस ढांचे की रक्षा करता है। एएसआई (ASI) ने हिंदुओं को हर मंगलवार को भोजशाला में पूजा करने का अधिकार दिया था, जबकि मुसलमानों को शुक्रवार को नमाज पढ़ने की अनुमति थी।