वैदिक पंचांग के अनुसार, जब ज्येष्ठ मास में अधिक मास (लौंद का महीना) लगता है, तो एकादशियों की संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि वेदव्यास जी ने भीमसेन को बताया था कि यदि कोई व्यक्ति वर्ष की सभी एकादशियां नहीं कर सकता, तो वह केवल ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का पूर्ण व्रत कर ले।
Nirjala Ekadashi Vrat 2026 : वैदिक पंचांग के अनुसार, जब ज्येष्ठ मास में अधिक मास (लौंद का महीना) लगता है, तो एकादशियों की संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि वेदव्यास जी ने भीमसेन को बताया था कि यदि कोई व्यक्ति वर्ष की सभी एकादशियां नहीं कर सकता, तो वह केवल ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का पूर्ण व्रत कर ले। इससे अधिक मास की दो एकादशियों (पद्मिनी और परमा एकादशी) सहित पूरे साल के सभी व्रतों का फल अकेले मिल जाता है।
सभी एकादशियों में श्रेष्ठ निर्जला एकादशी सबसे कठिन व्रतों में से है, क्योंकि इसमें अन्न-जल दोनों का त्याग किया जाता है।
एकादशी व्रत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। इस एकादशी का व्रत करने से पापों का क्षय होता है और विष्णुलोक की प्राप्ति होती है।
निर्जला एकादशी 2026 का व्रत 25 जून, गुरुवार को रखा जाएगा और पारण 26 जून, शुक्रवार को होगा। भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है।
निर्जला एकादशी तिथि और शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि का प्रारंभ : 24 जून 2026 (बुधवार) को शाम 06:12 बजे से।
एकादशी तिथि की समाप्ति : 25 जून 2026 (गुरुवार) को रात 08:09 बजे तक।
व्रत की तारीख (उदयातिथि के अनुसार): 25 जून 2026 (गुरुवार)
दान का महत्वविष्णु पूजा: सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु (विशेषकर उनके पुरुषोत्तम स्वरूप) की पूजा करें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
घड़े का दान: इस दिन पानी से भरे मिट्टी के घड़े (कलश) पर चीनी और दक्षिणा रखकर दान करने का विशेष महत्व है।
अन्य दान: गर्मी से राहत देने वाली वस्तुएं जैसे छाता, पंखा, खरबूजा और वस्त्र दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।