बसंत पंचमी भारत में बसंत ऋतु के आगमन का उत्सव मनाने वाला खास पर्व है। यह त्योहार वसंत ऋतु के पांचवें दिन ( पंचमी ) मनाया जाता है, इसलिए इसका नाम बसंत पंचमी है।
Basant Panchami 2025 : बसंत पंचमी भारत में बसंत ऋतु के आगमन का उत्सव मनाने वाला खास पर्व है। यह त्योहार वसंत ऋतु के पांचवें दिन ( पंचमी ) मनाया जाता है, इसलिए इसका नाम बसंत पंचमी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन लोग आमतौर पर पीले वस्त्र पहनते हैं और विद्या एवं कला की देवी सरस्वती की पूजा करते हैं। इस साल बसंत पंचमी 23 जनवरी को मनाई जाएगी। यह दिन नई शुरुआत, शिक्षा और रचनात्मकता का संदेश देता है।
बसंत पंचमी का महत्व
यह दिन मुख्य रूप से ज्ञान, बुद्धि, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती की पूजा के लिए समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वती की पूजा करने से अज्ञान दूर होता है और शिक्षा व रचनात्मक क्षेत्रों में सफलता मिलती है। इसलिए छात्र, कलाकार, संगीतकार और विद्वान इस पर्व को विशेष श्रद्धा के साथ मनाते हैं।
बसंत पंचमी 2026: तिथि और समय
माघ शुक्ल पंचमी की शुरुआत: 23 जनवरी 2026, सुबह 2:28 बजे
माघ शुक्ल पंचमी की समाप्ति: 24 जनवरी 2026, सुबह 1:46 बजे
सरस्वती पूजा मुहूर्त
23 जनवरी, सुबह 7:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक
मां सरस्वती के मंत्र
1. ‘ॐ शारदा माता ईश्वरी मैं नित सुमरि तोय हाथ जोड़ अरजी करूं विद्या वर दे मोय।’
2. सरस्वती गायत्री मंत्र : ‘ॐ वागदैव्यै च विद्महे कामराजाय धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्।’
3. नमस्ते शारदे देवी, काश्मीरपुर वासिनी,
त्वामहं प्रार्थये नित्यं, विद्या दानं च देहि में,
कंबू कंठी सुताम्रोष्ठी सर्वाभरणंभूषिता,
महासरस्वती देवी, जिव्हाग्रे सन्नी विश्यताम् ।।
शारदायै नमस्तुभ्यं , मम ह्रदय प्रवेशिनी,
परीक्षायां समुत्तीर्णं, सर्व विषय नाम यथा।।