यूपी के बहराइच जिले (Bahraich District) के बेसिक शिक्षा विभाग (Basic Education Department) में बच्चों की मुफ्त किताबों (Free Books) को रद्दी के भाव बेचने के मामले का बड़ा खुलासा हुआ है। इसका वीडियो शेयर कर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लिखा कि भाजपा ने शिक्षा को रद्दी कर दिया है।
लखनऊ। यूपी के बहराइच जिले (Bahraich District) के बेसिक शिक्षा विभाग (Basic Education Department) में बच्चों की मुफ्त किताबों (Free Books) को रद्दी के भाव बेचने के मामले का बड़ा खुलासा हुआ है। इसका वीडियो शेयर कर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लिखा कि भाजपा ने शिक्षा को रद्दी कर दिया है।
अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने कहा कि भाजपा सरकार ने पहले उप्र में, विलय के नाम पर 27000 सरकारी स्कूलों को बंद करने की साज़िश की थी और अब राज्यसभा में शिक्षा-विरोधी भाजपा सरकार ने ये स्वीकार किया है कि पिछले 5 सालों के भाजपा शासनकाल में 18,727 सरकारी स्कूल बंद हुए हैं। ये हमारे देश के भविष्य के विरुध्द एक बहुत बड़ा षड्यंत्र है। क्या भाजपाई और उनके संगी-साथी ये चाहते है कि अमीरों के बच्चे तो पढ़ें लेकिन पीडीए समाज के शोषित-वंचित बच्चे नहीं और पीडीए समाज के बच्चे श्रमिक-मज़दूर बनकर ही रह जाएं।
उन्होंने कहा कि भाजपा की शिक्षा विरोधी सोच ही किताब नहीं बंटवा रही है, सरकारी स्कूलों को बंद करवा रही है। भाजपाई जानते हैं कि शिक्षा से लोगों में जागरूकता और वैज्ञानिक चेतना आती है जो भाजपा की दक़ियानूसी, रूढ़िवादी, संकीर्ण सोच और तंग नज़रिये को उखाड़ फेंकने का काम करेगी। इसीलिए भाजपाई शिक्षा और ज्ञान-विज्ञान के ख़िलाफ़ रहते हैं तथा उनके संगी-साथी अपनी अति-संकीर्ण मानसिकता व एकरंगी नकारात्मक विचारधारा के तहत ही बच्चों को ढालना चाहते हैं।
बच्चों से शिक्षा-तालीम का अधिकार छीनना, भाजपाइयों का सामाजिक अपराध है। सरकारी शिक्षा के छिनने से सबसे ज़्यादा नुक़सान पीडीए समाज के लोगों को ही होगा क्योंकि शिक्षा के साथ-साथ पोषण के लिए मिलनेवाला मिड-डे मील भी बच्चों को नहीं मिलेगा, जिसका बुरा असर बच्चों के मानसिक-शारीरिक विकास पर होगा।
हमारा मानना है कि अगला चुनाव ऐतिहासिक होगा जब शिक्षा का विषय, भाजपा को हराने-हटाने के लिए एक निर्णायक मुद्दा बनेगा क्योंकि ग़रीब से ग़रीब परिवार और ख़ासतौर से हर माँ अपने बच्चे को पढ़ाना चाहती है। इस बार महिलाएं ही भाजपा को हराएंगी। भाजपा खातों में कुछ पैसे डालने का दिखावा करेगी लेकिन गाँव-गली-मोहल्ले तक ये बात फैल चुकी है कि अगर सरकारी स्कूल बंद हो गये तो प्राइवेट स्कूलों की लूट शुरू हो जाएगी और खाते में जितना आएगा नहीं उससे ज़्यादा बच्चों की पढ़ाई में ही चला जाएगा। अब लोग समझ गये हैं कि भाजपा जितना देती नहीं है उससे कहीं ज़्यादा सामानों के दाम बढ़ाकर और बिजली-पानी के बिल, गैस-डीज़ल-पेट्रोल-सिलेंडर, मोबाइल रिचार्ज, रेल-बस किराये, टोल-पार्किंग को महंगा करके व अन्य टैक्सों को बढ़ाकर वसूल लेती है।
अगर सरकारी शिक्षा ख़त्म हो गयी तो महंगाई और बेकारी-बेरोज़गारी के मारे लोग बच्चों को पढ़ा ही नहीं पायेंगे और जो किसी भी तरह पढ़ाना भी चाहेंगे तो उनकी सारी कमाई, प्राइवेट स्कूलों की भारी भरकम फ़ीस, यूनिफ़ॉर्म-ड्रेस, किताब-कॉपी-स्टेशनरी, बस्ता-बोटल-टिफ़िन, रिक्शा-बस, प्रोजेक्ट-एसाइनमेंट, स्कूल फ़ंक्शन-पिकनिक के खर्चों में ही निकल जाएगी।
भाजपा ने शिक्षा को रद्दी कर दिया है।
भाजपा सरकार ने पहले उप्र में, विलय के नाम पर 27000 सरकारी स्कूलों को बंद करने की साज़िश की थी और अब राज्यसभा में शिक्षा-विरोधी भाजपा सरकार ने ये स्वीकार किया है कि पिछले 5 सालों के भाजपा शासनकाल में 18,727 सरकारी स्कूल बंद हुए हैं। ये हमारे… pic.twitter.com/KZsZ1YoAmZ
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) February 23, 2026
इसके अतिरिक्त जो स्कूल चल भी रहे हैं वहां भी भाजपा शिक्षा का काम चलने ही नहीं देना चाहती है और शिक्षकों को पढ़ाई की जगह अन्य कामों में लगा देती है। इससे सच्चे शिक्षकों का मनोबल गिरता है क्योंकि उन्हें लगता है कि वो पढ़ाने का अपना कर्तव्य पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इस कारण शिक्षक-शिक्षार्थी और अभिभावक का संबंध भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। भाजपा सरकार की शिक्षा-विरोधी नीतियों की वजह से समाज में शिक्षा-शिक्षक के मान-सम्मान को चोट पहुँची है। इसीलिए शिक्षक समाज में भाजपा के ख़िलाफ़ गहरी नाराज़गी और असंतोष है। अगले चुनाव में भाजपा की हार के मुख्य कारणों में एक कारण शिक्षकों, शिक्षामित्रों, विद्यालयों के कर्मचारियों व शिक्षा से वंचित होते बच्चों के माता-पिता और उनके परिवार के अन्य लोगों का भाजपा के विरुध्द आक्रोश भी होगा।
लगता है ‘पीडीए पाठशाला’ के सांकेतिक आंदोलन को एक वास्तविक आंदोलन के रूप में बदलना होगा, तभी शोषित-वंचित समाज की पीढ़ियाँ आगे पढ़ और बढ़ पाएंगी।आइए हम सब मिलकर शिक्षा को बचाएं, अपने बच्चों का भविष्य बनाएं!