Karnataka IPL Tickets Uproar : कर्नाटक के विधायकों को दो आईपीएल टिकट देने के फ़ैसले की विपक्षी दल भाजपा के विधायक एस. सुरेश कुमार ने आलोचना की है। उन्होंने स्पीकर यू.टी. खादर को एक पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि मैचों के लिए उनके नाम पर कोई भी टिकट या पास वितरित न किए जाएं। उन्होंने इसे 'वीआईपी कल्चर' बढ़ावा देने वाला फैसला बताया है।
Karnataka IPL Tickets Uproar : कर्नाटक के विधायकों को दो आईपीएल टिकट देने के फ़ैसले की विपक्षी दल भाजपा के विधायक एस. सुरेश कुमार ने आलोचना की है। उन्होंने स्पीकर यू.टी. खादर को एक पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि मैचों के लिए उनके नाम पर कोई भी टिकट या पास वितरित न किए जाएं। उन्होंने इसे ‘वीआईपी कल्चर’ बढ़ावा देने वाला फैसला बताया है।
दरअसल, कर्नाटक के डिप्टी-सीएम डी.के. शिवकुमार ने शुक्रवार को कहा कि KSCA ने 28 मार्च को शहर के चिन्नास्वामी स्टेडियम में होने वाले IPL मैच के लिए हर विधायक को दो टिकट देने पर सहमति जताई है। भाजपा के विधायक एस. सुरेश कुमार ने अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि यह चौंकाने वाली बात है कि एक ऐसी सरकार के शासन में, जो खुद को समाजवादी होने का दावा करती है, इस VIP संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है।
एस. सुरेश कुमार ने इस बात पर हैरानी जताई कि सरकार विधानसभा में चर्चा के महज़ 24 घंटे बाद ही ऐसी घोषणा करने के लिए इतनी उत्सुक थी। विधायक ने अपने पत्र में कहा, “26 मार्च को, जब विधानसभा में ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) क्षेत्र में आम लोगों के सामने आ रही ज्वलंत समस्याओं पर चर्चा हो रही थी, तभी अचानक चिन्नास्वामी स्टेडियम के IPL मैच, विधायकों को टिकट वितरण और विधायकों के आचरण को लेकर चर्चा शुरू हो गई।”
उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि आम लोगों के गंभीर सवाल और समस्याएं सालों तक अनुत्तरित ही बनी रहती हैं। हालाँकि, जब विधायकों की सुविधाओं और टिकटों की बात आती है, तो सरकार की 24 घंटे के भीतर जवाब देने की तत्परता ने आम लोगों को हैरान कर दिया है और उनके प्रतिनिधियों के प्रति उनमें तिरस्कार की भावना जगा दी है।
बता दें कि कर्नाटक में कांग्रेस समेत अलग-अलग पार्टियों के सदस्यों ने आरोप लगाया कि स्टेडियम का प्रबंधन करने वाली संस्था KSCA ने उनके साथ “अपमानजनक” व्यवहार किया। विपक्ष के नेता आर. अशोका समेत कई विधायकों ने शिकायत की कि उन्हें सिर्फ़ एक टिकट दिया गया और मैचों के दौरान बैठने की उचित व्यवस्था नहीं दी गई। जिसके बाद सरकार ने सभी विधायकों को टिकट दिलवाने का आश्वासन दिया था।