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Budget 2026 : मल्लिकार्जुन खड़गे, बोले- मोदी सरकार के पास अब न आइडिया, न पॉलिसी विजन और न ही बची है कोई राजनीतिक इच्छाशक्ति

केंद्रीय बजट 2026-27 (Union Budget 2026-27) के बहाने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने मोदी सरकार (Modi Government) पर रविवार को बड़ा हमला बोला है। उन्होंने एक्स पोस्ट पर लिखा कि यह बजट देखकर यह साबित हो गया कि मोदी सरकार (Modi Government)  के पास अब आइडिया खत्म हो गए हैं।

By santosh singh 
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नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026-27 (Union Budget 2026-27) के बहाने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने मोदी सरकार (Modi Government) पर रविवार को बड़ा हमला बोला है। उन्होंने एक्स पोस्ट पर लिखा कि यह बजट देखकर यह साबित हो गया कि मोदी सरकार (Modi Government)  के पास अब आइडिया खत्म हो गए हैं। बजट 2026 (Budget 2026) भारत की कई आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों का एक भी समाधान नहीं देता है। “मिशन मोड” अब “चैलेंज रूट” बन गया है।

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उन्होंने लिखा कि “रिफॉर्म एक्सप्रेस” शायद ही कभी किसी “रिफॉर्म” जंक्शन पर रुकती है। इसका नतीजा हुआ कि सरकार के पास कोई पॉलिसी विजन नहीं, कोई राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं। उन्होंने कहा कि हमारे अन्नदाता किसान अभी भी सार्थक कल्याणकारी सहायता या आय सुरक्षा योजना का इंतजार कर रहे हैं।

मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने कहा कि असमानता ब्रिटिश राज के समय के स्तर को पार कर गई है, लेकिन बजट में इसका जिक्र तक नहीं है और न ही SC, ST, OBC, EWS और अल्पसंख्यक समुदायों को कोई सहायता दी गई है। वित्त आयोग की सिफारिशों का और अध्ययन करना होगा, लेकिन ऐसा नहीं लगता कि वे गंभीर वित्तीय तनाव से जूझ रही राज्य सरकारों को कोई राहत देंगी। संघवाद इसका शिकार हो गया है।

मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने कहा कि क्या गायब है और कहां इसकी ज़रूरत है?

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मैन्युफैक्चरिंग: कोई रिवाइवल रणनीति नहीं, 13 फीसदी पर अटकी हुई है। “मेक इन इंडिया” कहां है?

नौकरियाँ: हमारे युवाओं के लिए रोज़गार या वर्कफोर्स में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कोई गंभीर योजना नहीं। पिछली इंटर्नशिप और कौशल विकास योजनाओं का क्या नतीजा निकला?

निर्यात/व्यापार: निर्यात में गिरावट, टैरिफ जोखिम, व्यापार घाटा, घटते वैश्विक हिस्सेदारी पर कोई जवाब नहीं। गिरते रुपये के लिए कोई योजना है?

गरीब और मध्यम वर्ग: महंगाई से कोई राहत नहीं; बचत घट रही है, कर्ज बढ़ रहा है, वेतन स्थिर है। उपभोक्ता मांग को फिर से शुरू करने का कोई आइडिया क्यों नहीं?

निजी निवेश: कोई भरोसे का संकेत नहीं – FDI और वेतन में ठहराव को नज़रअंदाज़ किया गया। सिर्फ मामूली बदलाव क्यों, कोई संरचनात्मक सुधार क्यों नहीं?

इंफ्रास्ट्रक्चर: वादे दोहराए गए, डिलीवरी गायब – शहर अभी भी रहने लायक नहीं हैं। हमारे पास “स्मार्ट सिटी” या रहने लायक शहर कब होंगे?

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सामाजिक सुरक्षा: सामाजिक सुरक्षा और कल्याण पर एक भी महत्वपूर्ण घोषणा नहीं हुई। MGNREGA की जगह लेने वाले नए कानून के लिए आवंटन पर एक भी शब्द नहीं है। क्यों?

उन्होंने कहा कि यह बजट कोई समाधान नहीं देता, यहां तक कि पॉलिसी की कमी को छिपाने के लिए नारे भी नहीं।

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