यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने 'योगी की पाती' के जरिए प्रदेश के बच्चों और युवाओं को सोशल मीडिया के खतरों के प्रति सचेत किया है। उन्होंने रील बनाने और स्टंट करने की बढ़ती होड़ को जानलेवा बताया और युवाओं से 'रील और रियल' में अंतर समझाते हुए इस बार प्रदेश के बच्चों और युवाओं से मुखातिब हुए, अंतर को समझने की अपील करते हुए भावुक पत्र लिखा है।
लखनऊ : सोशल मीडिया के दौर में ‘रील’ (Reel) और ‘रियल’ (Real) वास्तविक जीवन के बीच युवा पीढ़ी फर्क नहीं समझ पा रही है। बता दें कि रील का मतलब जहां नकली दुनिया है, जो फिल्टर, स्क्रिप्ट और चुनिंदा सुनहरे पलों से बनी है। तो वहीं दूसरी ओर, वास्तविक जीवन (Real Life) संघर्षों, खामियों और सच्ची भावनाओं से भरी होती है। आजकल रील बनाने के चक्कर में युवा पीढ़ी अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं और परिवार अपनी खुशियां खो रहे हैं।
इसी बीच यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने ‘योगी की पाती’ के जरिए प्रदेश के बच्चों और युवाओं को सोशल मीडिया के खतरों के प्रति सचेत किया है। उन्होंने रील बनाने और स्टंट करने की बढ़ती होड़ को जानलेवा बताया और युवाओं से ‘रील और रियल’ में अंतर समझाते हुए इस बार प्रदेश के बच्चों और युवाओं से मुखातिब हुए, अंतर को समझने की अपील करते हुए भावुक पत्र लिखा है। साथ ही उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि रील बनाने और खतरनाक स्टंट करने की होड़ जानलेवा हो सकती है, इसलिए युवाओं को रील की जगह रियल लाइफ चुनने की सलाह दी है। वहीं योगी ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि वे रोजाना बच्चों से बात करें, उनका मोबाइल इस्तेमाल देखें और उन्हें खतरनाक स्टंट से दूर रखें।

मेरे प्यारे बच्चों,
सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव ने विश्व को डिजिटल डेमोक्रेसी में परिवर्तित किया है। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स आज सृजनात्मकता, संचार एवं सूचना के सशक्त माध्यम हैं। परंतु इसी क्रम में एक चिंताजनक प्रवृत्ति भी सामने आई है। यह है जीवन को जोखिम में डालकर रील बनाने एवं सेल्फी लेने की बढ़ती होड़। आज अनेक युवा लाइक, व्यूज और फॉलोअर्स के मोहजाल में पड़कर घरों के अंदर और सड़क पर स्टंट, तेज रफ्तार बाइक एवं कार पर करतब दिखाने, रेलवे ट्रैक पर और ट्रेन के दरवाजों से लटककर वीडियो बनाने, ऊंची इमारतों, पहाड़ों, नदियों, पुलों, एक्सप्रेसवे और यहां तक कि पानी की टंकियों पर खतरनाक ढंग से सेल्फी लेने जैसे जोखिम उठा रहे हैं। यह न केवल उनके लिए घातक है, बल्कि उनके अपनों के सपनों को भी क्षणभर में तोड़ सकता है। आए दिन होने वाली दुर्घटनाएं इसकी साक्षी हैं।
अक्सर हम आंतरिक नकारात्मकता, अकेलेपन या दिखावे की मानसिकता के कारण डिजिटल दुनिया में कुछ अलग करने का प्रयास करते हैं। ऑनलाइन गेमिंग और अत्यधिक स्क्रीन टाइम ने भी इस प्रवृत्ति को बढ़ाया है, जिसका प्रभाव सामाजिक व्यवहार और व्यक्तित्व विकास पर पड़ता है।
अक्सर हम आंतरिक नकारात्मकता, अकेलेपन या दिखावे की मानसिकता के कारण डिजिटल दुनिया में कुछ अलग करने का प्रयास करते हैं। ऑनलाइन गेमिंग और अत्यधिक स्क्रीन टाइम ने भी इस प्रवृत्ति को बढ़ाया है, जिसका प्रभाव सामाजिक व्यवहार और व्यक्तित्व विकास पर पड़ता है। ऐसे किशोर एवं युवा साथियों से मैं कहना चाहूंगा कि आप पर परिवार, समाज, प्रदेश एवं देश का दायित्व है। आप उनके प्रति अपना योगदान देकर वास्तविक नायक बन सकते हैं। इंटरनेट पर ट्रेंड देखकर स्वयं को वायरल करने का प्रयास घातक हो सकता है। रील बनाएं, जिसका विषय सांस्कृतिक, अपनी धरोहर से संबंधित और समाज में सकारात्मकता पैदा करने वाले हों। लाइक और व्यूज के लिए जीवन दांव पर न लगाएं। ‘रील’ और ‘रियल’ में अंतर करना सीखिए।
प्रिय अभिभावकों, मैं कुछ बातें आपसे भी कहना चाहता हूं। सोशल मीडिया के इस युग में डिजिटल अवेयरनेस और डिजिटल लिट्रेसी अत्यंत आवश्यक है। सोशल मीडिया का उपयोग ज्ञान और सकारात्मक अभिव्यक्ति के लिए होना चाहिए। यह आपका भी दायित्व है कि आपके बच्चे समय का सदुपयोग करें। अपने बच्चों को रचनात्मक कार्यों के लिए प्रेरित करें। प्रदेश सरकार ने युवाओं के लिए अनेक योजनाएं चला रखी हैं। अपनी रुचि के अनुसार युवा उनका लाभ उठायें। याद रखें, समृद्ध प्रदेश का आधार सशक्त युवा हैं और इनके उज्ज्वल भविष्य का प्रथम द्वार घर की व्यावहारिक शिक्षा से ही खुलता है।
आपका
योगी आदित्यनाथ
बता दें कि सिद्धार्थनगर के कांशीराम कॉलोनी में शनिवार को हुए पानी टंकी हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। 30 साल पुरानी जर्जर टंकी पर रील बनाने चढ़े पांच बच्चों में से तीन सीढ़ी टूटने से नीचे गिर पड़े। 10 साल के सिद्धार्थ की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गोलू और सनी गंभीर हालत में गोरखपुर रेफर किए गए। वहीं पवन और शाबान टंकी के ऊपर ही 16 घंटे तक फंसे रहे। हादसे की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद कमान संभाली। उन्होंने अफसरों को सख्त निर्देश दिए कि बच्चों को सुरक्षित निकालने में कोई ढिलाई न हो। रातभर एसडीआरएफ की कोशिशें जलभराव और दलदली जमीन के कारण नाकाम रहीं। हालात बिगड़ते देख डीएम ने राहत आयुक्त से हेलीकॉप्टर मांगा। रविवार सुबह 5.20 बजे भारतीय वायुसेना का हेलीकॉप्टर पहुंचा और दोनों बच्चों को एयरलिफ्ट कर गोरखपुर पहुंचाया गया।
डीएम शिवशरणप्पा ने बताया कि टंकी दो दशक पहले ही कंडम घोषित हो चुकी थी, फिर भी बच्चे वहां पहुंच गए। स्थानीय लोगों ने कहा कि बच्चे अक्सर उस टंकी पर चढ़ते थे। सीएम योगी की यह चिट्ठी सिर्फ पत्र नहीं, एक चेतावनी है। रील की दुनिया से बाहर निकलकर हमें बच्चों को रियल जिंदगी का मतलब सिखाना होगा। एक लापरवाही पूरे घर का चिराग बुझा सकती है।