पवन खेड़ा ने कहा कि, 2024 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कोयला मंत्री को एक प्रपोजल भेजा कि हम जॉइंट वेंचर के तहत एक 1320 MW का थर्मल पावर प्लांट लगाएंगे। ये जॉइंट वेंचर (UJVN-THDC) का होगा, जो राउंड द क्लॉक काम करेगा, ताकि राज्य में बिजली सप्लाई कम न हो। CM धामी ने भारत सरकार के कोयला मंत्री को कोल सप्लाई के लिए भी पत्र लिखा। 6 महीने बाद कोयला मंत्री की तरफ से इस प्लांट के लिए अप्रूवल आ गया। लेकिन 16 जनवरी 2025 को अचानक उत्तराखंड सरकार ने इस जॉइंट वेंचर को रद्द कर दिया। इसे रद्द करने के कारण में कहा गया कि वेंचर समय पर काम पूरा नहीं कर पाएगा, जबकि जॉइंट वेंचर की तरफ से कहा गया था कि हम काम पूरा कर लेंगे।
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने गुरुवार को प्रेस कॉफ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने कहा, ‘Pushkar Selling Uttarakhand’-हम ऐसी बात क्यों कर रहे हैं- वो आपको समझ आएगा…T-20 क्रिकेट टीम की तरह ही BJP के पास एक 420 टीम है। BJP की इस टीम ने 86 नियमों में से 84 नियम बदल दिए। फिर इन बदले नियमों के आधार पर टेंडर की प्रक्रिया को बदला गया और काम अडानी को सौंप दिया गया। यानी एक बार फिर से ‘गौतम शरणम् गच्छामि’ हो गया।
पवन खेड़ा ने कहा कि, 2024 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कोयला मंत्री को एक प्रपोजल भेजा कि हम जॉइंट वेंचर के तहत एक 1320 MW का थर्मल पावर प्लांट लगाएंगे। ये जॉइंट वेंचर (UJVN-THDC) का होगा, जो राउंड द क्लॉक काम करेगा, ताकि राज्य में बिजली सप्लाई कम न हो। CM धामी ने भारत सरकार के कोयला मंत्री को कोल सप्लाई के लिए भी पत्र लिखा। 6 महीने बाद कोयला मंत्री की तरफ से इस प्लांट के लिए अप्रूवल आ गया। लेकिन 16 जनवरी 2025 को अचानक उत्तराखंड सरकार ने इस जॉइंट वेंचर को रद्द कर दिया। इसे रद्द करने के कारण में कहा गया कि वेंचर समय पर काम पूरा नहीं कर पाएगा, जबकि जॉइंट वेंचर की तरफ से कहा गया था कि हम काम पूरा कर लेंगे।
उन्होंने कहा कि, इसके बाद 3 फरवरी 2025 को उत्तराखंड सरकार ने एक टेंडर निकाला। इसी दिन अडानी पावर ने छत्तीसगढ़ में कोरबा एक्सपेंशन के लिए Environmental Clearance की एप्लीकेशन डाल दी। जिसके बाद टेंडर निकालने वाली UPCL एक चिट्ठी लिखती है और 86 शर्तों में से 84 शर्तें बदलने की मांग करती है। नतीजा- 86 में से 84 शर्तें बदल दी गईं। बदली गई कुछ शर्तों में 1320 MW बिजली एक ही बिडर से आनी चाहिए। प्लांट देश के किसी भी कोने में हो सकता है, उसका उत्तराखंड में होना जरूरी नहीं है। शिफ्टिंग कॉस्ट उत्तराखंड की जनता चुकाएगी।
पवन खेड़ा ने कहा, BJP की 420 टीम ने अपने लोगों को मैच जिताने के लिए ढंग से पिच तैयार की और टेंडर के कंस्ट्रक्शन की टाइम लिमिट भी बढ़ा दी। यूनिट-1 के लिए 42 महीने, यूनिट-2 के लिए 48 महीने…इसके अलावा, tariff structure में fixed charge ceiling को 70% से बढ़ाकर 75% कर दिया गया। इससे यह गारंटी हो जाती है कि अडानी पावर से उत्तराखंड बिजली ले या न ले- 25 साल तक कंपनी को पैसा मिलता रहेगा। यानी- आपको बिजली चाहिए तो ले लीजिए। अगर नहीं लेनी है तो घर जाइए, मगर पैसे देकर जाइए।
उन्होंने आगे कहा कि, छत्तीसगढ़ में अडानी की कंपनी ‘Pelma Collieries Limited’ को 2022 में MDO बनाया गया है। यानी- कोयले की माइनिंग से लेकर प्लांट और उसके उत्पादन-ट्रांसपोर्टेशन का काम अडानी की कंपनी करेगी और बिजली भी अडानी ही बेचेंगे। बिजली उत्तराखंड की जनता के पैसे से तैयार होगी, लेकिन उसका पूरा प्रोजेक्ट छत्तीसगढ़ में चलेगा और इसमें कैबिनेट अप्रूवल भी आया है कि यह प्रोजेक्ट 25 साल तक अडानी के पास रहेगा। 1.66 लाख करोड़ रुपए का Power Purchase Agreement 25 अगस्त 2026 से ₹5.74 प्रति यूनिट की दर से शुरू हो गया है। मलतब- पैसा उत्तराखंड का, कोयला छत्तीसगढ़ का और फायदा अडानी का।