केंद्र सरकार अब UPI के बड़े ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाने का फैसला किया है। इसे फैसले को लेकर पूरे देश में बहस छिड़ गई है। जहां कुछ विशेषज्ञ इसे एक सराहनीय कदम बता रहे हैं। वहीं विपक्षी दल आम लोगों पर वित्तीय बोझ बढ़ने का हवाला देकर इस कदम की आलोचना भी कर रहे हैं।
नई दिल्ली। केंद्र सरकार अब UPI के बड़े ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाने का फैसला किया है। इसे फैसले को लेकर पूरे देश में बहस छिड़ गई है। जहां कुछ विशेषज्ञ इसे एक सराहनीय कदम बता रहे हैं। वहीं विपक्षी दल आम लोगों पर वित्तीय बोझ बढ़ने का हवाला देकर इस कदम की आलोचना भी कर रहे हैं। इसी बीच नीति आयोग के वाइस चेयरमैन अशोक कुमार लाहिड़ी (NITI Aayog Vice Chairman Ashok Kumar Lahiri) का एक बयान चर्चा में आ गया है। अशोक कुमार लाहिड़ी (Ashok Kumar Lahiri) ने हाल ही में इस कदम का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि सरकार बिना टैक्स वसूले नहीं चलाई जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार महज मामूली चार्ज वसूल रही है और इसे देने में लोगों को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
हालांकि अशोक कुमार लाहिड़ी (Ashok Kumar Lahiri) ने स्पष्ट किया कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत राय है। यह नीति आयोग का आधिकारिक रुख नहीं है। उन्होंने नए फैसलों पर बात करते हुए कहा कि सरकार हर ट्रांजैक्शन पर अनिश्चितकाल के लिए सब्सिडी नहीं दे सकती। उन्होंने कहा कि मेरा मानना यह है कि लोगों को हर काम के लिए टैक्स देना ही चाहिए।
चाणक्य नीति का दिया हवाला
अशोक कुमार लाहिड़ी (Ashok Kumar Lahiri) ने आगे चाणक्य की नीतियों का उदाहरण देते हुए अपनी बात समझाई। उन्होंने कहा कि एक राजा को अपनी प्रजा से टैक्स ठीक उसी तरह वसूलना चाहिए, जैसे मधुमक्खी फूल को बिना कोई नुकसान पहुंचाए धीरे-धीरे शहद इकट्ठा करती है।
‘40 पैसे देने से मर जाओगे क्या?’
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक लाहिड़ी ने बड़े ट्रांजैक्शन पर लगने वाले मामूली चार्ज की तुलना चेकबुक जैसी अन्य बैंकिंग सेवाओं से की। उन्होंने कहा कि आंकड़ों को देखिए। 100 रुपये के ट्रांजैक्शन पर आपको सिर्फ 40 पैसे देने हैं, वह भी केवल बड़े लेन-देन पर… क्या इससे आपकी जान निकल जाएगी? बिल्कुल नहीं। आपको व्यवस्था को चलाने के लिए लागत देनी होगी और धीरे-धीरे इसकी आदत पड़ जाएगी।
जानें सरकार का क्या है UPI पर प्लान?
इससे पहले सरकार ने आगामी 15 अक्टूबर से व्यापारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लागू किया है। इसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी (पी2एम) यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाया जाएगा। हालांकि, 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर कोई एमडीआर शुल्क (MDR charges) नहीं लगेगा। यह शुल्क व्यापारियों को देना होगा।
UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर
अब केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में याचिका दायर हो गई है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि यह शुल्क पर्याप्त कानूनी सुरक्षा उपायों, पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श के बिना लागू किया गया है। अधिवक्ता अंजन दत्ता द्वारा दायर या हिका में केंद्र सरकार की 14 सितंबर की अधिसूचना और 15 सितंबर को घोषित एमडीआर व्यवस्था को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि यह व्यवस्था मनमानी और भेदभावपूर्ण है और इससे कम मार्जिन पर काम करने वाले व्यापारियों पर बुरा असर पड़ सकता है। इसमें उपभोक्ताओं पर अनदेखे बोझ और डिजिटल भुगतान (Digital payments) से वंचित होने की आशंका भी जताई गई है।