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Crocodile Mummy : 3000 साल पुरानी मगरमच्छ की ममी का पोस्टमार्टम , चौंकाने वाले खुलासे हुए

ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने प्राचीन मिस्र बारे में चौकाने वाले खुलासे किए है। मिस्र की सभ्यता के बारे में कई ऐसे रहस्यों का खुलासा किया जिससे दुनिया अभी तक अनजान थी।

By अनूप कुमार 
Updated Date

Crocodile Mummy :  ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने प्राचीन मिस्र बारे में चौकाने वाले खुलासे किए है। मिस्र की सभ्यता के बारे में कई ऐसे रहस्यों का खुलासा किया जिससे दुनिया अभी तक अनजान थी। वैज्ञानिकों ने थ्रीडी इमेजिंग से बताया है कि कैसे नील नदी से मगरमच्छों को पकड़ा जाता था।

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पकड़ने के बाद इनका ममीकरण किया जाता और देवता सोबेक को बलि चढ़ा दी जाती। देवता सोबेक का चेहरा भी मगरमच्छ जैसा बताया गया है। वैज्ञानिकों को 3 हजार साल पुरानी ममी मिली है। एक्स-रे की मदद से उन्होंने दिखाया है कि कैसे इस 2.2 मीटर (7 फुट से ज्यादा) लंबे मगरमच्छ को नील नदी से पकड़ा गया था? फिर उसे मारा गया और बाद में ममीकरण किया गया। इस मगरमच्छ ने कांटे से बंधी एक मछली को निगल लिया था। इसके बाद पत्थरों को निगला था। इस प्रक्रिया को गैस्ट्रोलिथ कहा जाता है। इस ममी को बर्मिंघम संग्रहालय और आर्ट गैलरी में रखा गया है। यहां इसे 2005.335 सीरियल नंबर दिया गया है।

मगरमच्छ को मानते थे देवता का अवतार
वैज्ञानिकों के अनुसार पाचन तंत्र में अधिक गैस्ट्रोलिथ की मौजूदगी से पता लगता है कि जानवर निगलते ही मर गया था। मैनचेस्टर विश्वविद्यालय की ओर से भी इस संबंध में शोध किया गया है। मगरमच्छ को जिस मछली के कांटे से मारा गया है, वैज्ञानिकों ने उसकी प्लास्टिक और कांस्य की कॉपी बनाने के लिए 3D तस्वीरों को यूज किया है। मैनचेस्टर विश्वविद्यालय की शोध फेलो राइटर लिडिजा मैकनाइट के अनुसार पहले अनरैपिंग और पोस्टमार्टम के लिए सही तरीके नहीं अपनाए जाते थे। 3D रेडियोग्राफी आकर्षक कलाकृतियों को नुकसान पहुंचाए बिना अंदर देखने की तकनीक को विकसित करती है।

प्राचीन मिस्र के लोग मगरमच्छ को सोबेक देवता का अवतार मानते थे। वे सोबेक को नील नदी का स्वामी या पृथ्वी को रचने वाला मानते थे। मिथ्या है कि उनका सिर नील नदी के मगरमच्छ का और अगला हिस्सा शेर और पिछला हिस्सा दरियाई घोड़े जैसा था।

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