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युवाओं में तेजी से बढ़ रहा ‘ब्रेन फॉग’ और भूलने की बीमारी; रिसर्च में सामने आई चौंकाने वाली वजह

'ब्रेन फॉग' स्वयं में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह मानसिक स्पष्टता की कमी, एकाग्रता में गिरावट और भूलने की प्रवृत्ति का एक लक्षण है। इसमें व्यक्ति को सोचने, याद रखने और निर्णय लेने में सामान्य से अधिक समय लगता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस समस्या के पीछे कोई अनुवांशिक (genetic) कारण नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की दिनचर्या और खान-पान में आई गिरावट मुख्य वजह है।

By Sushil Sah 
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क्या आप भी अक्सर घर की चाबी रखकर भूल जाते हैं? या काम करने के दौरान अचानक आपका दिमाग बिल्कुल शांत (ब्लैकआउट) हो जाता है? अगर हाँ, तो इस संकेत को बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। याददाश्त कमजोर होने और अचानक बातें भूलने की यह समस्या अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि 18 से 30 वर्ष के युवाओं में भी यह तेजी से फैल रही है।

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स्वास्थ्य विशेषज्ञों की हालिया रिसर्च में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि कम उम्र के युवाओं में ब्रेन फॉग (Brainfog) और याददाश्त कमजोर होने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

क्या है ‘ब्रेन फॉग’?

चिकित्सकों के अनुसार, ‘ब्रेन फॉग’ स्वयं में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह मानसिक स्पष्टता की कमी, एकाग्रता में गिरावट और भूलने की प्रवृत्ति का एक लक्षण है। इसमें व्यक्ति को सोचने, याद रखने और निर्णय लेने में सामान्य से अधिक समय लगता है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस समस्या के पीछे कोई अनुवांशिक (genetic) कारण नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की दिनचर्या और खान-पान में आई गिरावट मुख्य वजह है।

डॉक्टरो के अनुसार इस समस्या के तीन मुख्य कारण हैं, पोषक तत्वों की कमी, आहार में जरूरी विटामिन्स और ओमेगा-3 फैटी एसिड का न होना। अत्यधिक मानसिक तनाव, पढ़ाई, करियर और काम का बढ़ता दबाव। बिगड़ती जीवनशैली (Lifestyle) देर रात तक स्क्रीन (मोबाइल/लैपटॉप) का इस्तेमाल और अधूरी नींद। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शुरुआती दौर में ही अपनी आदतों में सुधार कर लिया जाए, तो इस समस्या से पूरी तरह छुटकारा पाया जा सकता है। इसके लिए डॉक्टरों ने तीन मुख्य सुझाव दिए हैं:

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आहार में करें सुधार: अपनी रोज़ाना की डाइट में अखरोट,बादाम, हरी पत्तेदार सब्जियाँ , ताजे फल और ओमेगा-3 से भरपूर खाद्य पदार्थों को ज़रूर शामिल करें।

स्क्रीन टाइम घटाएं और पूरी नींद लें: देर रात तक फोन चलाने की आदत को तुरंत बदलें। दिमाग को रीसेट करने के लिए रोजाना 7 से 8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण (गहरी) नींद बेहद जरूरी है। रात को सोने से एक घंटा पहेले फोन का इस्तेमाल करना बंद कर दे। उस एक घंटे मे आप किताबे पड़ सकते है य परिवार के साथ टाइम स्पेड़ करे।

तनाव प्रबंधन (Stress Management): मानसिक तनाव को कम करने और फोकस बढ़ाने के लिए हर दिन कम से कम 15 मिनट प्राणायाम, योग या माइंडफुलनेस (ध्यान) का अभ्यास करें।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की विशेषज्ञ की राय

एक सेहतमंद और सक्रिय दिमाग ही आपकी सबसे बड़ी ताकत है। आज के डिजिटल युग में अपने दिमाग को आराम देना और सही पोषण देना उतना ही जरूरी है जितना कि शारीरिक रूप से फिट रहना।

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रिर्पोट:

दीपांजली मिश्रा 

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