पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों में मंदी के रूख के बीच आज शुरुआती कारोबार में भारतीय रूपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 18 पैसे टूटकर 96.38 के नए सर्वकालिक निचले स्तर (All-time Low) पर आ गया। विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि लगातार घरेलू शेयर बाजार से विदेशी फंडों की निकासी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण रुपये पर दबाव और बढ़ गया है।
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों में मंदी के रूख के बीच आज शुरुआती कारोबार में भारतीय रूपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 18 पैसे टूटकर 96.38 के नए सर्वकालिक निचले स्तर (All-time Low) पर आ गया। विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि लगातार घरेलू शेयर बाजार से विदेशी फंडों की निकासी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण रुपये पर दबाव और बढ़ गया है। आज रूपया अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार (Forex Market) में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.24 पर खुला, और कुछ ही मिनटों के बाद 18 पैसे की भारी गिरावट देखने को मिली। यह गिरावट 96.38 के रिकॉर्ड निचले स्तर को छू गया। हांलाकि इससे पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 96.20 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ था।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, यह गिरावट कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के कारण हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच के संकट के गहराने से अब ब्रेंट क्रूड ऑयल वायदा 1.34 प्रतिशत की तेजी के साथ $111.45 प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जिसके वजह से भारत का आयात बिल बढ़ने की काफी आशंका है। वही दूसरी ओर अमेरिकी डॉलर सूचकांक (DXY) 99.32 के स्तर पर मजबूत बना हुआ है क्योंकि वैश्विक बाजारों में इसकी मांग सुरक्षित निवेश के लिए बढ़ गई है। इसके अलावा अमेरिका का 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड भी बढ़कर 4.62 प्रतिशत हो गई है। साथ ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय शेयर मार्केटों से लगातार अपनी पूंजी निकाल रहे हैं, जिससे डॉलर की मांग में काफी बढ़ोतरी हुई है।
भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल दूसरे देशों से मंगाता है। इसलिए यदि रुपया कमजोर होगा तो कच्चा तेल महंगा हो जाएगा जिसके चलते देश में पेट्रोल-डीजल और माल ढुलाई की लागत भी बढ़ जाएगी। इसका असर आम जनता पर भी देखने को मिलेगा। जिसकी वजह से अंतर्राष्ट्रीय दौरों और विदेशों में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों का खर्च अब सीधे तौर पर बढ़ जाएगा। साथ ही विदेशों से आयात होने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के दाम भी बढ़ जाएंगे।
सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के विश्लेषकों का कहना है कि वर्तमान में डॉलर और रुपया (USD-INR) जोड़ी के लिए 96.00 से 96.50 का दायरा काफी संवेदनशील बना हुआ है। यदि अभी भी भू-राजनीतिक तनाव में कमी नहीं आती है, तो आने वाले दिनों में रूपया 97 के स्तर की ओर बढ़ सकता है। हालांकि, बाजार को अत्यधिक उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा हस्तक्षेप किए जाने की पूरी संभावना है।
रिपोर्ट : सुशील कुमार साह