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DRDO और भारत फोर्ज मिलकर बनाएंगे सीक्यूबी कार्बाइन, भारतीय सेना से मिला 2000 करोड़ का ठेका

भारतीय सैनिकों (Indian Army)  के हाथ में जल्द ही स्टर्लिंग कार्बाइन (Sterling Carbine) की जगह आधुनिक मशीन गन नजर आएगी। भारतीय सेना (Indian Army) में सैनिक क्लोज क्वार्टर बैटल (CQB) कार्बाइन का इस्तेमाल करते नजर आएंगे।

By संतोष सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली। भारतीय सैनिकों (Indian Army)  के हाथ में जल्द ही स्टर्लिंग कार्बाइन (Sterling Carbine) की जगह आधुनिक मशीन गन नजर आएगी। भारतीय सेना (Indian Army) में सैनिक क्लोज क्वार्टर बैटल (CQB) कार्बाइन का इस्तेमाल करते नजर आएंगे। सेना ने रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (DRDO) और भारत फोर्ज लिमिडेट को सीक्यूबी कार्बाइन (CQB Carbine) बनाने का ऑर्डर दिया है। दो हजार करोड़ के के इस ठेके के साथ डीआरडीओ (DRDO) और भारत फोर्ज लिमिटेड (Bharat Forge Limited) को सेना की प्रमुख खरीद निविदा में सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L1) के तौर पर चुना गया है।

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डीआरडीओ (DRDO) ने बताया कि 5.56×45 मिमी सीक्यूबी कार्बाइन (CQB Carbine) को डीआरडीओ (DRDO) के आयुध अनुसंधान और विकास प्रतिष्ठान (ARDI) डीआरडीओ (DRDO) ने डिजाइन और विकसित किया है। साथ ही भारत फोर्ज लिमिटेड (Bharat Forge Limited)  ने बनाया है। दोनों के प्रस्ताव को भारतीय सेना आरएफपी (प्रस्ताव के लिए अनुरोध) में एल1 के रूप में चुना गया है। बताया जाता है कि भारत फोर्ज (Bharat Forge) की सहायक कंपनी कल्याणी स्ट्रेटेजिक सिस्टम्स लिमिटेड की पुणे इकाई में कार्बाइन का उत्पादन किया जाएगा। यह अनुबंध दो हजार के दशक में सेना मे इंसास राइफल के शामिल होने के बाद भारत में डिजाइन, विकसित और निर्मित हथियार प्रणाली के लिए सबसे बड़ा है।

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स्टर्लिंग कार्बाइन से बदलने की तैयारी

भारतीय सेना में मौजूदा समय में 1940 में डिजाइन की गई सब मशीन गन स्टर्लिंग कार्बाइन (Sterling Carbine) का उपयोग किया जाता है। सेना लंबे समय से स्टर्लिंग कार्बाइन (Sterling Carbine) को बदलने की तैयारी कर रही थी। स्टर्लिंग कार्बाइन (Sterling Carbine) मौजूदा युद्ध परिस्थितियों के हिसाब से पुरानी मानी जाती है। इसलिए पुणे में डीआरडीओ (DRDO) के आयुध अनुसंधान और विकास प्रतिष्ठान (ARDI) ने नई कार्बाइन डिजाइन का संकल्प लिया।

नई कार्बाइन की विशेषता

5.56×45 मिमी सीक्यूबी कार्बाइन (CQB Carbine) की विशेषता है कि यह हल्की, नजदीकी मुठभेड़ों में सटीक जवाब देने में सक्षम है। इसमें कई आधुनिक विशेषताएं हैं। इसके डिजाइन में ऑप्टिक्स, लेजर डिजाइनर और सहायक उपकरण लगाए गए हैं। इस कार्बाइन का निर्माण फोर्ज की पुणे मे इकाई में होगा। भारतीय सेना के एल1 बोलीदाता के रूप में डीआरडीओ (DRDO)  और भारत फोर्ज के चयन से साफ है कि इसमें सभी तकनीकी जरूरतों को पूरा करते हुए सबसे कम कीमत पेश की और बड़ा अनुबंध हासिल किया।

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