आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के लिए BRICS के मंच से चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 5-पॉइंट प्लान पेश किया है। इस पहल में व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, औद्योगिक सहयोग और बाजार एकीकरण जैसे क्षेत्रों पर जोर दिया गया है। चीन का दावा है कि इससे BRICS देशों के बीच आर्थिक सहयोग और विकास को नई गति मिलेगी।
नई दिल्ली। आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के लिए BRICS के मंच से चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 5-पॉइंट प्लान पेश किया है। इस पहल में व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, औद्योगिक सहयोग और बाजार एकीकरण जैसे क्षेत्रों पर जोर दिया गया है। चीन का दावा है कि इससे BRICS देशों के बीच आर्थिक सहयोग और विकास को नई गति मिलेगी।
हालांकि, चीन की इस पहल को लेकर भारत की नजर इसके संभावित प्रभावों पर है। खासतौर पर चीनी सामान, टेक्नोलॉजी और AI से जुड़े उत्पादों की बढ़ती पहुंच को लेकर नई दिल्ली सतर्क रह सकती है। भारत एक ओर BRICS के भीतर आर्थिक और तकनीकी सहयोग बढ़ाने के पक्ष में है, वहीं दूसरी ओर अपनी घरेलू इंडस्ट्री, डिजिटल सुरक्षा और रणनीतिक हितों को लेकर सावधानी बरत रहा है।
ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या चीन BRICS के आर्थिक सहयोग के जरिए अपने सामान और टेक्नोलॉजी के लिए बड़ा बाजार तैयार करना चाहता है? क्या इसके अलावा यह पहल वास्तव में सभी सदस्य देशों के साझा विकास का रास्ता खोलेगी? अब भारत के लिए चुनौती BRICS सहयोग और अपनी रणनीतिक आत्मनिर्भरता के बीच संतुलन बनाए रखने की होगी।