Delhi Students Protest : केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक अर्ज़ी दायर की है। इसमें दिल्ली और दूसरे राज्यों में NEET पेपर लीक के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हिंसा के आरोपों को लेकर पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की गई है। अदालत इस मामले की सुनवाई कल (मंगलवार, 1 सितंबर) करेगी।
Delhi Students Protest : केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक अर्ज़ी दायर की है। इसमें दिल्ली और दूसरे राज्यों में NEET पेपर लीक के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हिंसा के आरोपों को लेकर पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की गई है। अदालत इस मामले की सुनवाई कल (मंगलवार, 1 सितंबर) करेगी।
केंद्र सरकार संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए, छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी FIR को रद्द करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी दाखिल की है। भारत के सॉलिसिटर जनरल ने इस मामले को कल ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया है। CJI ने कल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति दे दी है।
मेहता ने CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने यह अर्ज़ी रखी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार चाहती है कि शीर्ष अदालत संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करे और प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज FIR को रद्द करके पूरा न्याय करे। अदालत इस मामले की सुनवाई कल (मंगलवार, 1 सितंबर) करेगी।
भारत के सॉलिसिटर जनरल ने सीजेआई के सामने मौखिक रूप से यह मामला उठाया, जब बेंच उठने ही वाली थी, और कल ही इस पर तत्काल सुनवाई की मांग की। जब CJI ने पूछा कि यह अर्ज़ी किस बारे में है, तो SG ने जवाब दिया, “यह उस विरोध-प्रदर्शन के बारे में है… FIR रद्द करने के लिए… हम अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर रहे हैं।” CJI सूर्य कांत ने जवाब दिया, “ठीक है, आप फ़ाइल करें। अगर पक्ष समझौता कर रहे हैं… तो हमें कोई दिक्कत नहीं है।”
बता दें कि यह कदम सीजेपी की ओर से दिल्ली में 5 सितंबर को घोषित विरोध मार्च से पहले उठाया गया है। यह मार्च इस आरोप को लेकर है कि केंद्र सरकार ने उन प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ मामले वापस लेने का अपना वादा पूरा नहीं किया है, जिन्होंने जुलाई में देशभर में परीक्षा का पेपर लीक होने के मुद्दे पर हुए विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था। 25 जुलाई को छात्रों के विरोध प्रदर्शन को खत्म करने के लिए CJP की ओर से रखी गई शर्तों में से एक शर्त इन मामलों को वापस लेना भी थी।