बिहार के कटिहार जिले में भारी बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने भारी तबाही मचाई है। गंगा, कोसी, बरंडी और कारी कोसी नदियों के उफान पर होने के कारण अब तक जिले की 3.43 लाख से अधिक की आबादी बाढ़ की चपेट में आ चुकी है। जिला प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुल 236 गांव और 10 शहरी मुहल्ले पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं। वहीं सबसे नाजुक स्थिति कोसी नदी की है, जो खतरे के निशान से 156 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।
कटिहार। बिहार के कटिहार जिले में भारी बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने भारी तबाही मचाई है। गंगा, कोसी, बरंडी और कारी कोसी नदियों के उफान पर होने के कारण अब तक जिले की 3.43 लाख से अधिक की आबादी बाढ़ की चपेट में आ चुकी है। जिला प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुल 236 गांव और 10 शहरी मुहल्ले पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं। वहीं सबसे नाजुक स्थिति कोसी नदी की है, जो खतरे के निशान से 156 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।
मुख्य बिंदु
कटिहार के कुरसेला, बरारी, मनिहारी और अमदाबाद प्रखंडों में बाढ़ का सबसे भीषण असर देखने को मिल रहा है। इन इलाकों में गांवों का मुख्य सड़कों से संपर्क पूरी तरह टूट चुका है। इसके अलावा यहां पर घरों, विद्यालयों और सरकारी भवनों में बाढ़ का पानी घुस जाने की वजह से हजारों लोग ड्रम और नावों के सहारे अपने मवेशियों और जरूरी सामान के साथ सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों पर पलायन करने को मजबूर हो गए हैं। आपको बता दें कि खेतों में लगी सैकड़ों एकड़ खड़ी फसलें पानी में डूबकर नष्ट हो चुकी हैं, जिससे किसानों के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
राहत और प्रशासन की तैयारी
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इन बाढ़ प्रभावित इलाकों में पीने के साफ पानी, भोजन, दूध और आवश्यक दवाओं की भारी किल्लत देखी जा रही है। मजबूर ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पर्याप्त संख्या में सरकारी नावें, पॉलिथीन शीट्स यानी तिरपाल और सूखा राशन मुहैया कराने की मांग की है। वहीं प्रशासन की ओर से राहत बचाव कार्य शुरू करते हुए प्रभावित क्षेत्रों में नावें उतारी गई हैं और राहत सामग्री पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। यहां जल संसाधन विभाग द्वारा भी संवेदनशील तटबंधों की लगातार निगरानी की जा रही है।