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फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों का दाव पड़ा उल्टा, पीएम सेबेस्टियन ने एक महीने में दिया इस्तीफा, क्या है वजह?

फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू (French Prime Minister Sebastian Lecornu) ने एक महीने में ही पद से इस्तीफा दे दिया है। लेकोर्नू पहले फ्रांस के रक्षा मंत्री के पद पर तैनात थे। राष्ट्रपति मैक्रों (French President Macron) ने उन्हें पीएम बनाया था। मात्र 30 दिनों के अंदर दिए इस इस्तीफे ने एक बार फिर फ्रांस में राजनीतिक संकट गहरा गया है।

By संतोष सिंह 
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नई दिल्ली। फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू (French Prime Minister Sebastian Lecornu) ने एक महीने में ही पद से इस्तीफा दे दिया है। लेकोर्नू पहले फ्रांस के रक्षा मंत्री के पद पर तैनात थे। राष्ट्रपति मैक्रों (French President Macron) ने उन्हें पीएम बनाया था। मात्र 30 दिनों के अंदर दिए इस इस्तीफे ने एक बार फिर फ्रांस में राजनीतिक संकट गहरा गया है। गौर करने की बात यह है कि राष्ट्रपति ने उनके इस्तीफे को स्वीकार भी कर लिया है।

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फ्रांस में पिछले कुछ समय से राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। रविवार को राष्ट्रपति मैक्रों ने देर रात बैठक की थी जिसके बाद उनके मंत्रीमंडल में कोई बड़े बदलाव को नहीं देखा गया और उन्होंने नए कैबिनेट लाइनअप का ऐलान कर दिया था। इस घोषणा के बाद ही प्रधानमंत्री ने इस्तीफा दे दिया।

सेबेस्टियल लेकोर्नू (Sebastian Lecornu) 1 महीने के अंदर इस्तीफा देने के बाद फ्रांस के सबसे कम कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री बन गए हैं। मैक्रों के तरफ से की गई नियुक्ति के बाद भी ऐसा फैसला लेना कई समस्याओं की तरफ इशारा करता है। वहीं, इस्तीफे के पीछे वजह फ्रांस का सार्वजनिक ऋण माना जा रहा है।

बता दें कि फ्रांस सरकार (French Government) ने अब तक जितना कर्ज लिया है, वह इतिहास में सबसे ज्यादा हो गया है। यानी सरकार को अपने खर्च पूरे करने के लिए अब बहुत ज्यादा उधार लेना पड़ रहा है। इसका रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुका है। इस प्रकार यूरोपियन यूनियन में ग्रीस और इटली के बाद फ्रांस पर सबसे ज्यादा कर्ज है।

क्या फेल हो गया मैक्रों का प्लान?

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राष्ट्रपति मैक्रों (French President Macron)  ने देश की स्थिति को मजबूत करने की उम्मीद करते हुए पिछले साल के मध्य में आकस्मिक संसदीय चुनावों का ऐलान किया था। माना जा रहा है कि चुनाव होने के बाद से फ्रांस राजनीतिक गतिरोध के बीच फंस गया है। इसलिए, मैक्रों का दाव भी उल्टा पड़ गया और अब विधानसभा में उनका गुट अल्पमत हो चुका है।

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