‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (Cockroach Janata Party) के फाउंडर अभिजीत दिपके (Abhijeet Dipke) ने केंद्रीय और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पर निशाना साधा है। सीजेपी (CJP) को सोशल मीडिया पर व्यपाक समर्थन पा रहे कैंपन पर टिप्पणी करने को लेकर दिपके ने संसदीय कार्य मंत्री पर हमला बोला है।
नई दिल्ली । ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (Cockroach Janata Party) के फाउंडर अभिजीत दिपके (Abhijeet Dipke) ने केंद्रीय और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू (Union Minister for Minority Affairs, Kiren Rijiju) पर निशाना साधा है। सीजेपी (CJP) को सोशल मीडिया पर व्यपाक समर्थन पा रहे कैंपन पर टिप्पणी करने को लेकर दिपके ने संसदीय कार्य मंत्री पर हमला बोला है। बता दें कि रिजिजू ने आरोप लगाया था कि सीजेपी को मिल रहा समर्थन भारत के युवाओं का नहीं है। पाकिस्तान समेत अन्य देश के युवा इस कैंपेन का सपोर्ट कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने शनिवार को एक एक्स पोस्ट में लिखा,कि मुझे उन लोगों पर तरस आता है जो सोशल मीडिया पर पाकिस्तान और जॉर्ज सोरोस के गिरोह से अपने फॉलोअर्स ढूंढते हैं। भारत की आबादी काफी बड़ी है और यहां के युवा बहुत ऊर्जावान हैं, जो सच्चे और कीमती फॉलोअर्स बन सकते हैं। भारत-विरोधी गिरोह से अपनी मान्यता लेने की कोई जरूरत नहीं है।
This is the screen recording of our audience demographic which we have shared with media before our account was hacked.
More than 94% of the audience is from India.
Why is a Union Minister @KirenRijiju labelling Indian youth as Pakistani? https://t.co/av0WnxIOui pic.twitter.com/W4YY1LL1IJ
पढ़ें :- कॉकरोच जनता पार्टी के फॉलोअर्स 12.2 मिलियन पार', बीजेपी के फिलहाल 8.7 मिलियन, यूजर्स बोले-'पिक्चर अभी बाकी है दोस्तों'
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) May 23, 2026
अभिजीत दिपके ने किया पलटवार
उनके इसी एक्स पोस्ट पर दिपके ने पलटवार किया है। उन्होंने सीजेपी के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट का यूजर्स इनसाइट शेयर किया है। अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा है, कि यह हमारे ऑडियंस डेमोग्राफिक्स की स्क्रीन रिकॉर्डिंग है, जिसे अकाउंट हैक होने से पहले हमने मीडिया के साथ शेयर किया था। हमारी 94 प्रतिशत से ज्यादा ऑडियंस भारत से है। फिर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) भारतीय युवाओं को पाकिस्तानी क्यों बता रहे हैं?
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Chief Justice of India Surya Kant) द्वारा “व्यवस्था पर हमला करने वालों” पर की गई टिप्पणी के जवाब में बनाई गई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (Cockroach Janata Party) को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। कैंपेन की लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही सत्ताधारी बीजेपी ने इसकी आलोचना करने में तेजी दिखाई है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का आरोप है कि सोशल मीडिया पर उभरे इस ट्रेंड के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ है, जिसका मकसद भारत को अस्थिर करना है।
हालांकि, जहां एक तरफ पार्टी का आधिकारिक रुख इस मामले पर अडिग है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के भीतर और उसके सहयोगियों के बीच से कुछ ऐसी आवाजें भी उठ रही हैं, जो इस मामले में सावधानी बरतने की सलाह दे रही हैं। इन आवाजों का मानना है कि युवाओं में पनप रहे असंतोष को सिर्फ पाबंदी लगाकर या दबाकर शांत नहीं किया जा सकता।
गौरतलब है कि 15 मई को मुख्य न्यायाधीश ने एक वकील को फटकार लगाई थी। उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) को उन्हें ‘सीनियर एडवोकेट’ का दर्जा देने के संबंध में निर्देश देने की मांग करते हुए एक याचिका दायर की थी।
मुख्य न्यायाधीश ने क्या कहा था?
मुख्य न्यायाधीश ने सवाल उठाया कि क्या इस दर्जे को पीछा करना या इसके लिए जोर लगाना उचित लगता है। उन्होंने कहा कि समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी मौजूद हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं और क्या आप उनके साथ हाथ मिलाना चाहते हैं? कुछ युवा कॉकरोच की तरह होते हैं, जिन्हें न तो कोई रोजगार मिलता है और न ही इस पेशे में कोई जगह। उनमें से कुछ मीडिया में चले जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया पर सक्रिय हो जाते हैं, कुछ RTI कार्यकर्ता या अन्य कार्यकर्ता बन जाते हैं और वे हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं।
इन टिप्पणियों से काफी हंगामा मच गया था। इसी के जवाब में अभिजीत दिपके ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (Cockroach Janata Party) नाम की एक सोशल मीडिया कैंपेन की शुरुआत की, जिसे देश के युवाओं का व्यापक समर्थन मिल रहा है।
सत्ताधारी बीजेपी ने वायरल ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (Cockroach Janata Party) हैंडल की आलोचना करने में तेजी दिखाई है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का आरोप है कि सोशल मीडिया पर उभरे इस ट्रेंड के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ है, जिसका मकसद भारत को अस्थिर करना है। लेकिन, जहां एक तरफ पार्टी का आधिकारिक रुख इस मामले पर अडिग है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के भीतर और उसके सहयोगियों के बीच से कुछ ऐसी आवाजें भी उठ रही हैं, जो इस मामले में सावधानी बरतने की सलाह दे रही हैं। इन आवाजों का मानना है कि युवाओं में पनप रहे असंतोष को सिर्फ पाबंदी लगाकर या दबाकर शांत नहीं किया जा सकता।