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CJP प्रदर्शन में गए छात्र अक्षत त्रिपाठी को गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी ने थमाया 5 लाख रुपये का नोटिस, SFI ने खोला मोर्चा

देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर हुए एक राजनीतिक विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बनना ग्रेटर नोएडा के एक यूनिवर्सिटी छात्र के लिए बेहद भारी पड़ गया है। गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी (GBU) में पढ़ाई कर रहे छात्र अक्षत त्रिपाठी (Akshat Tripathi) को स्थानीय प्रशासन ने लॉ एंड ऑर्डर बिगाड़ने की आशंका के तहत 5 लाख रुपये का भारी-भरकम मुचलका भरने का नोटिस (5 Lakh Bond Notice) जारी किया है।

By santosh singh 
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गौतमबुद्ध।  देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर हुए एक राजनीतिक विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बनना ग्रेटर नोएडा के एक यूनिवर्सिटी छात्र के लिए बेहद भारी पड़ गया है। गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी (GBU) में पढ़ाई कर रहे छात्र अक्षत त्रिपाठी (Akshat Tripathi) को स्थानीय प्रशासन ने लॉ एंड ऑर्डर बिगाड़ने की आशंका के तहत 5 लाख रुपये का भारी-भरकम मुचलका भरने का नोटिस (5 Lakh Bond Notice) जारी किया है। अक्षत स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की उत्तर प्रदेश राज्य समिति के एक सक्रिय पदाधिकारी भी हैं। प्रशासन के इस कड़े कदम के बाद शैक्षणिक संस्थानों और छात्र संगठनों में तीखी बहस छिड़ गई है।

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BNSS की धारा 130 के तहत कार्रवाई

यह पूरा मामला ग्रेटर नोएडा के कार्यपालक मजिस्ट्रेट-3 की अदालत से जुड़ा है, जिन्होंने 4 सितंबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत अक्षत त्रिपाठी को कारण बताओ नोटिस भेजा। पुलिस की स्थानीय चौकी और ईकोटेक-1 थाने के सब-इंस्पेक्टर द्वारा दाखिल की गई रिपोर्ट को इस कानूनी कार्रवाई की मुख्य वजह बनाया गया है। पुलिस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले आयोजित प्रदर्शन के दौरान अक्षत ने युवाओं और विद्यार्थियों को एकत्र करके शासन-प्रशासन के खिलाफ भड़काने की साजिश रची थी।

लाठीचार्ज में चोटिल होने का छात्र का दावा

दूसरी तरफ, आरोपी छात्र अक्षत त्रिपाठी ने पुलिस के इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। अक्षत का कहना है कि उन्होंने किसी भी तरह की हिंसा या उपद्रव में भाग नहीं लिया, बल्कि एक नागरिक के नाते शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखी थी। उन्होंने बताया कि जिस समय यह घटना हुई, उस दौरान उनका विश्वविद्यालय लगभग 3 महीने से बंद चल रहा था और वे अपनी कक्षाओं में नहीं जा रहे थे। अक्षत के मुताबिक, 20 जुलाई को सीजेपी के संसद मार्च के समय दिल्ली पुलिस की ओर से की गई धक्का-मुक्की और लाठीचार्ज में उन्हें शारीरिक चोटें भी आई थीं। उनका तर्क है कि अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरना संविधान में मिला मौलिक अधिकार है।

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SFI ने खोला मोर्चा

इस प्रशासनिक कार्रवाई के सामने आते ही छात्र संगठन एसएफआई (SFI) ने उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय पुलिस तंत्र के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन का आरोप है कि जंतर-मंतर पर परीक्षा में धांधली, पेपर लीक, बढ़ती बेरोजगारी और शिक्षा प्रणाली की बदहाली जैसे ज्वलंत विषयों पर आवाज बुलंद की गई थी। एसएफआई का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दंडात्मक धाराएं लगाना कानून का सरासर दुरुपयोग है। छात्र नेताओं ने चेतावनी देते हुए इस भारी-भरकम नोटिस को अविलंब निरस्त करने की मांग उठाई है, हालांकि शासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी फिलहाल इस विवादित नोटिस पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।

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