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Mahashivratri 2025 : महाशिवरात्रि पर इस विधि से करें भोलेबाबा की पूजा, कन्याओं को मिलेगा मनचाहा वर

Mahashivratri 2025 : यूं तो भोलेनाथ को प्रसन्न करने के कई अवसर आते है, परंतु महाशिवरात्रि विशेष है। मान्यता है कि इस दिन भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करने से साधक के बड़े से बड़े कष्टों का निवारण होता है, इतना ही नहीं यह दिन माता पार्वती का आशीर्वाद पाने के लिए भी उत्तम है।

By संतोष सिंह 
Updated Date

Mahashivratri 2025 : यूं तो भोलेनाथ को प्रसन्न करने के कई अवसर आते है, परंतु महाशिवरात्रि विशेष है। मान्यता है कि इस दिन भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करने से साधक के बड़े से बड़े कष्टों का निवारण होता है, इतना ही नहीं यह दिन माता पार्वती का आशीर्वाद पाने के लिए भी उत्तम है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक महाशिवरात्रि महादेव (Mahashivratri Mahadev) और देवी पार्वती (Goddess Parvati) के विवाह की ‘वैवाहिक वर्षगांठ’ के रूप में मनाई जाती है, इसलिए इस तिथि पर शिव-पार्वती (Shiva-Parvati) की जोड़ी की उपासना का विधान है।

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कहते हैं कि महाशिवरात्रि (Mahashivratri) पर यदि सच्चे प्रेम भाव से उपवास किया जाए, तो प्रेम जीवन की समस्याएं समाप्त होने लगती हैं। वहीं इस दिन भोलेनाथ को बेर चढ़ाने से मनचाहा वर पाने की कामना भी पूर्ण होती हैं। बता दें इस साल 26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। इस तिथि पर श्रवण नक्षत्र और परिध योग का संयोग बन रहा है। इस योग में विधि-विधान से शंकर जी की पूजा करने पर योग्य वर की कामना पूरी होती हैं। ऐसे में आइए इस दिन की पूजा विधि के बारे में जानते हैं।

महाशिवरात्रि पूजा मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त- 26 फरवरी को प्रात: काल में 05:17 से लेकर 06:05 मिनट तक

रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – शाम 06:29 से रात 09 बजकर 34 मिनट तक

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रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय – रात 09:34 से 27 फरवरी सुबह 12 बजकर 39 मिनट तक

रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय – 27 फरवरी को रात 12:39 से सुबह 03 बजकर 45 मिनट तक

रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय – 27 फरवरी को सुबह 03:45 से 06 बजकर 50 मिनट तक

महाशिवरात्रि पूजा विधि

महाशिवरात्रि पर सुबह ही स्नान कर लें और साफ वस्त्रों को धारण करें।

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अब घर में गंगाजल का छिड़काव करें।

अब पूजा स्थान पर आकर महादेव का नाम जपें।

सबसे पहले शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, शहद और शुद्ध जल से अभिषेक करें

फिर बेलपत्र व धतूरा चढ़ाएं।

अब महादेव पर फूल अर्पित करें।

दीपक और धूप जला लें।

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शिवलिंग पर बेर चढ़ाने की परंपरा है, इसलिए बेर अवश्य चढ़ाएं।

भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें।

महादेव की चालीसा का पाठ करें।

अब आरती करें और प्रसाद चढ़ाएं।

इसके बाद इस प्रसाद को सभी में बांटें।

अंत में मनचाहा वर पाने की कामना करें और पूजा में हुई भूल की क्षमा मांगे।

शिव जी की आरती

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ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।

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