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लोकसभा में परिसीमन नहीं हुआ वापस, तो दक्षिणी भारतीय करेंगे विरोध प्रदर्शन- मुख्यमंत्री एमके स्टालिन

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और DMK अध्यक्ष एमके स्टालिन ने बुधवार को केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन संशोधन विधेयक को तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों के साथ एक बड़ा ऐतिहासिक अन्याय बताया।

By Satish Singh 
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नई दिल्ली। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और DMK अध्यक्ष एमके स्टालिन ने बुधवार को केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन संशोधन विधेयक को तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों के साथ एक बड़ा ऐतिहासिक अन्याय बताया। उन्होने पूरे राज्य में काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया। स्टालिन ने सवाल उठाया कि क्या तमिलनाडु और दक्षिणी राज्यों को भारत के विकास में योगदान देने के लिए सज़ा दी जा रही है। उन्होने चेतावनी दी कि इस कदम से पूरे क्षेत्र में व्यापक गुस्सा फैल गया है। उन्होंने कहा कि क्या तमिलनाडु और दक्षिणी राज्यों को भारत के विकास के लिए प्रयास करने के अपराध की सज़ा दी जा रही है। परिसीमन संशोधन विधेयक, जिसे केंद्र की भाजपा सरकार कल संसद में पेश करने की योजना बना रही है। तमिलनाडु और दक्षिणी राज्यों पर थोपा गया एक बड़ा ऐतिहासिक अन्याय है।

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मुख्यमंत्री एमके स्टालिन आरोप लगाया कि पूरे दक्षिण भारत के लोग इस प्रस्तावित कदम से नाराज़ हैं। भाजपा को इसके साथ आगे न बढ़ने की चेतावनी दी। स्टालिन ने कहा कि विंध्य के दक्षिण में रहने वाला हर दक्षिण भारतीय गुस्से से उबल रहा है। भाजपा आग से खेल रही है। विरोध प्रदर्शनों का आह्वान करते हुए डीएमके अध्यक्ष ने लोगों से तमिलनाडु भर में अपने घरों और सार्वजनिक स्थानों पर काले झंडे फहराने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि कल पूरे तमिलनाडु में परिसीमन के विरोध में घरों और सार्वजनिक स्थानों पर काले झंडे फहराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार तमिलनाडु की आवाज़ को अनसुना करती है और प्रस्ताव वापस नहीं लेती है, तो आपको इसके परिणाम भुगतने होंगे। इसके लिए आपको भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। यह टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब सरकार 16, 17 और 18 अप्रैल को होने वाले संसद के विशेष सत्र के दौरान प्रमुख विधायी प्रस्तावों को पेश करने की तैयारी कर रही है। इस सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में संशोधनों के साथ-साथ एक प्रस्तावित परिसीमन विधेयक पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार 2029 के आम चुनावों से महिला आरक्षण अधिनियम को लागू करने की अपनी व्यापक योजना के तहत लोकसभा के आकार में महत्वपूर्ण विस्तार करने पर विचार कर रही है। इस प्रस्ताव में लोकसभा की कुल सीटों की संख्या को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने की बात शामिल है।

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