मिर्गी की बीमारी को लेकर कई तरह तरह के भ्रम और अफवाहें समाज में फैली हुई है। हर साल 9 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मिर्गी दिवस मनाया जाता है।
मिर्गी क्या है? सच्चाई को समझना जरूरी
मिर्गी दिमाग में होने वाली असामान्य Electrical activity के कारण होती है। इस दौरान व्यक्ति को दौरे (Seizures) पड़ते हैं, जिनमें शरीर का झटकना, कुछ देर के लिए होश खो देना या आंखों का ऊपर की ओर चढ़ जाना शामिल हो सकता है। यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है बचपन से लेकर बुजुर्ग अवस्था तक। सबसे जरूरी बात यह है कि मिर्गी संक्रामक नहीं होती, न ही इससे व्यक्ति की बुद्धि, समझ या क्षमता पर कोई असर पड़ता है। सही इलाज मिलने पर ज्यादातर मरीज पूरी तरह सामान्य जीवन जीते हैं।
शहर और गांव में इलाज में क्यों है फर्क?
भारत में शहरी इलाकों में लोग आमतौर पर समय पर जांच और इलाज करवा लेते हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई लोग मिर्गी को झाड़-फूंक, पूजा-पाठ या अंधविश्वास से जोड़कर देखते हैं। इससे Medical treatment में देरी होती है और बीमारी और गंभीर बन जाती है।
मिर्गी के कारण और ट्रिगर (Causes and Triggers of Epilepsy)
मिर्गी के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे जेनेटिक कारण, दिमाग में संक्रमण, ट्यूमर या स्ट्रोक, सिर में गंभीर चोट, तेज बुखार, लो ब्लड शुगर, नींद की कमी या बहुत ज्यादा तनाव कुछ लोगों में तेज चमकती रोशनी या स्क्रीन दौरे को ट्रिगर कर सकती है, लेकिन यह बीमारी का कारण नहीं होती यह एक आम भ्रम है।
शीघ्र निदान के प्रमुख लाभ
लंबे समय तक चलने वाले दौरे और जटिलताओं को रोकता है: ईईजी और एमआरआई के माध्यम से समय पर निदान से status epilepticus का खतरा कम हो जाता है, जो लंबे समय तक चलने वाले दौरे से जुड़ी एक चिकित्सा आपात स्थिति है।
दौरे पर नियंत्रण में सुधार : समय पर दी जाने वाली दौरे रोधी दवाओं से 70% रोगियों को दौरे से मुक्ति मिलती है, जिससे चोट का खतरा और अचानक मृत्यु (SUDEP) कम हो जाती है।
जीवन की गुणवत्ता में सुधार: शीघ्र देखभाल सामान्य गतिविधियों को संभव बनाती है, कलंक के कारण होने वाले अलगाव को कम करती है और बच्चों में संज्ञानात्मक विकास को बढ़ावा देती है।