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Hormuz Strait: होर्मुज में अमेरिकी नाकाबंदी से ईरान पस्त, 6 अरब डॉलर डूबे, रसातल में पहुंची इकोनॉमी!

ईरान के कुल निर्यात का लगभग 80 प्रतिशत तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, घेराबंदी के चलते ईरान की तरफ से विदेशों में बेचे जाने वाले कच्चे तेल की मात्रा में भारी कमी हुई है खासकर उसके सबसे बड़े ग्राहक चीन को।

By Sushil Sah 
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तेहरान: अमेरिका की नाकेबंदी के चलते अभी तक 6 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान ईरान को हो चुका है। पिछले महिने में ईरान का कच्चा तेल निर्यात छह साल के सबसे निचले स्तर तक पहुंच गया है। आपको बता दे कि अमेरिका ने 13 अप्रैल को ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू की थी और ट्रंप अभी भी शांति समझौतों की शर्तों को मानने का प्रेशर बना रहे हैं। वहीं तेहरान ने इसे गैर-कानूनी बताते हुए अपने बंदरगाहों के आस-पास अमेरिकी जहाजों को जब्त करने की कार्रवाई को समुद्री डकैती का नाम दिया है।

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इस तेल सप्लाई के बंद होने से पूरी दुनिया में ऊर्जा की कीमतें तेजी से बढ़ीं और सऊदी अरब, कुवैत, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों से होनेवाले निर्यात में भारी कमी आई। हालांकि इस नाकेबंदी से पहले ईरान काफी हद तक अपना तेल निर्यात जारी रखने में सफल रहा। वास्तव में ईरान को इसका जबरदस्त फायदा भी हुआ और तेल निर्यात में तेजी से बढ़ोतरी हुई। लेकिन यह स्थिती अमेरिकी नाकेबंदी शुरू होने के बाद तेजी से बदल गई। इस नाकेबंदी की वजह से ईरान की अर्थव्यवस्था को अब बहुत अधिक आर्थिक नुकसान हो रहा है जिसकी वजह से यह सवाल उठ रहा है कि ईरान कब तक ईरान यह युद्ध जारी रख पाएगा?

ईरान के तेल निर्यात पर क्या असर पड़ा है?

ट्रेड इंटेलिजेंस फर्म Kpler के मुताबिक, मई में ईरान का कच्चा तेल और कंडेनसेट निर्यात लगभग 20 लाख बैरल प्रति दिन से घटकर 3 लाख bpd से भी कम हो गया। इस Kpler ने तुलना के लिए नाकेबंदी शुरू होने से पहले के 40 दिनों के आंकड़ों का इस्तेमाल किया है। इन आंकड़ों से पता चल रहा है कि ईरान के कच्चे तेल की कीमतें $90 प्रति बैरल से ऊपर रहीं और कभी-कभी $100 से भी अधिक हो गई।

यदि 90 डॉलर प्रति बैरल की कीमत का अनुमान लगाएं तो 300,000 बैरल प्रति दिन (bpd) के एक्सपोर्ट से प्रत्येक दिन लगभग 27 मिलियन डॉलर या मई के महीने में लगभग 837 मिलियन डॉलर की कमाई हुई होगी। मार्च में जब एक्सपोर्ट औसतन 1.84 मिलियन बैरल प्रति दिन था तो ईरान महीने भर में लगभग 5.13 अरब डॉलर कमा रहा था। जब अप्रैल में एक्सपोर्ट औसतन 1.34 मिलियन बैरल प्रति दिन था जिससे महीने के दौरान लगभग 3.62 बिलियन डॉलर की कमाई हुई।

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अमेरिका के सामने कब तक डटा रहेगा ईरान?

‘लॉयड्स लिस्ट’ के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च की तुलना में मई में ईरान की तेल से होने वाली कमाई लगभग 84 प्रतिशत कम थी। ईरान को अप्रैल और मई में 5.8 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। अल जज़ीरा की रिपोर्ट में केप्लर ने बताया है कि नाकेबंदी की वजह से ईरान से बाहर जाने वाले नए तेल की मात्रा में भारी कमी आई है लेकिन हो सकता है कि इसमें खरीदारों तक पहुंचने वाले सभी ईरानी तेल का हिसाब न हो। क्योंकि कुछ कार्गो मलेशिया के पास जहाजों के बीच ट्रांसफर किए जा रहे हैं।

क्या ईरान अभी भी तेल का उत्पादन कर रहा है?

ईरान कच्चे तेल का उत्पादन कर रहा है लेकिन उसे तेल को स्टोर करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। क्योंकि वो तेल को बेच नहीं पा रहा है। एनर्जी पॉलिसी रिसर्चर और कंसल्टेंट मार्क अयूब ने अल जज़ीरा को बताया है ‘ईरान अपनी बची हुई स्टोरेज क्षमता का रणनीतिक रूप से उपयोग कर रहा है। डेटा के मुताबिक, नाकेबंदी काम कर रही है लेकिन असली दबाव तब बनेगा जब वह स्टोरेज खत्म होने लगेगा। इसका मतलब हैं कि जब ईरान के पास तेल स्टोर करके रखने की क्षमता खत्म हो जाएगी तो उसे मजबूरी में तेल का उत्पादन बंद करना होगा।

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