करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद लगातार सामने आ रही तकनीकी खामियों को लेकर चर्चा में है। एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद महज 20 दिनों के भीतर अलग-अलग स्थानों पर सड़क की ऊपरी सतह धंसने और क्षतिग्रस्त होने की पांच घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसके बाद निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने पूरे मामले की समीक्षा शुरू कर दी है..
लखनऊ। करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद लगातार सामने आ रही तकनीकी खामियों को लेकर चर्चा में है। एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद महज 20 दिनों के भीतर अलग-अलग स्थानों पर सड़क की ऊपरी सतह धंसने और क्षतिग्रस्त होने की पांच घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसके बाद निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने पूरे मामले की समीक्षा शुरू कर दी है।
उद्घाटन के बाद से एक्सप्रेसवे पर लगातार तकनीकी खामियां सामने आ रही हैं। महज 20 दिनों के भीतर उन्नाव के कोरारी, बेगमखेड़ा, तूरी, जगेथा और किलोमीटर-64 के पास सड़क धंसने या बैठने की पांच घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन घटनाओं के बाद निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं और NHAI ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। बारिश के दौरान कई स्थानों पर सड़क की ऊपरी परत उखड़ने और सतह बैठने की घटनाएं सामने आईं। हर बार संबंधित हिस्से की मरम्मत कर यातायात बहाल किया गया, लेकिन बार-बार सामने आ रही खामियों ने एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर बहस छेड़ दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक NHAI अब पूरे एक्सप्रेसवे का दोबारा तकनीकी निरीक्षण कराने की तैयारी में है। जिन स्थानों पर बार-बार समस्या आई है, वहां विशेषज्ञों की टीम से विस्तृत जांच कराई जाएगी। यदि निर्माण में किसी स्तर पर लापरवाही या गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।
सुरक्षा के मद्देनजर एक्सप्रेसवे पर वाहनों की गति सीमा की भी समीक्षा की जा रही है। जांच पूरी होने तक कुछ हिस्सों में स्पीड लिमिट कम करने समेत अन्य एहतियाती कदम उठाए जा सकते हैं, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
हालांकि NHAI का कहना है कि जिन स्थानों पर नुकसान हुआ, वहां सड़क पूरी तरह नहीं धंसी थी बल्कि केवल ऊपरी ‘वियरिंग कोट’ प्रभावित हुई थी। प्राधिकरण के अनुसार प्रभावित हिस्सों की मरम्मत कुछ ही घंटों में कर दी गई थी और फिलहाल एक्सप्रेसवे पर यातायात सामान्य रूप से संचालित हो रहा है। 63 किलोमीटर लंबे इस छह लेन एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को किया गया था। लगभग 66 करोड़ रूपये प्रति किलोमीटर एक्सप्रेसवे बनाने में लगे है। इसके शुरू होने से लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा का समय घटकर करीब 35 से 45 मिनट रह गया है, लेकिन शुरुआती दिनों में सामने आई घटनाओं ने इसकी गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।