बंगाल की खाड़ी में एक बेहद दर्दनाक और बड़ा समुद्री हादसा देखने को मिला है। यहां खराब मौसम के कारण रोहिंग्या शरणार्थियों को ले जा रही दो नावें पानी में डूब गई हैं। संयुक्त राष्ट्र की दो मुख्य संस्थाओं, 'अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन' (International Organization for Migration) और 'संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त' (United Nations High Commissioner for Refugees) द्वारा जारी एक संयुक्त बयान के मुताबिक, इस हादसे में 500 से अधिक लोगों के डूबकर मरने का अनुमान लगाया जा रहा है।
यूनियन नेशन (UN)। आज यानी 17 जुलाई को बंगाल की खाड़ी में एक बेहद दर्दनाक और बड़ा समुद्री हादसा देखने को मिला है। यहां खराब मौसम के कारण रोहिंग्या शरणार्थियों को ले जा रही दो नावें पानी में डूब गई हैं। संयुक्त राष्ट्र की दो मुख्य संस्थाओं, ‘अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन’ (International Organization for Migration) और ‘संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त’ (United Nations High Commissioner for Refugees) द्वारा जारी एक संयुक्त बयान के मुताबिक, इस हादसे में 500 से अधिक लोगों के डूबकर मरने का अनुमान लगाया जा रहा है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, दोनों नावें जून के आखिरी सप्ताह में म्यांमार के पश्चिमी रखाइन (Rakhine) प्रांत से रवाना हुई थीं। इन नावों पर सवार अधिकांश लोग म्यांमार के प्रताड़ित रोहिंग्या समुदाय के थे। वहीं कुछ लोग बांग्लादेश के भीड़भाड़ वाले शरणार्थी शिविरों से सुरक्षित ठिकाने की तलाश में निकले थे।
खराब मौसम और ओवरलोडिंग बनी वजह
सूत्रों के अनुसार, पहली नाव पर लगभग 250 लोग सवार थे, जो म्यांमार के रखाइन तट से निकलने के कुछ ही समय बाद लापता हो गई। इसके बाद दूसरी नाव 8 जुलाई को लगभग 280 यात्रियों को ले जा रही थी, जो म्यांमार के इरावदी तट के पास समुद्र में उठे भीषण तूफान और खराब मौसम की चपेट में आने से पूरी तरह डूब गई। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ओवरलोडिंग और सुरक्षा उपकरणों की भारी कमी के कारण नावें समुद्र की ऊंची लहरों को नहीं झेल सकीं।
दुनिया का सबसे खतरनाक समुद्री मार्ग
आपको बता दे कि यूएन एजेंसियों ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा है कि अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी का यह इलाका शरणार्थियों और प्रवासियों के लिए सबसे जानलेवा समुद्री मार्ग बन चुका है। म्यांमार में हिंसा और बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों की बदहाल स्थिति से तंग आकर हर साल हजारों रोहिंग्या अपनी जान जोखिम में डालकर नावों के जरिए मलेशिया या इंडोनेशिया जैसे देशों में शरण लेने के लिए रवाना होते हैं।
हालांकि, दुर्गम परिस्थितियों और संचार व्यवस्था ठप होने के कारण अभी तक हताहतों की सटीक संख्या की आधिकारिक पुष्टी नहीं हो पाई हैं। लेकिन यूएन ने आशंका जताया है कि नाव पर सवार लगभग सभी लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा मानवाधिकार संगठनों ने इस त्रासदी के बाद दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से समुद्र में फंसे प्रवासियों के लिए तत्काल खोज और बचाव अभियान (Search and Rescue) चलाने की अपील की है।