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पति ने पहली पत्नी के रहते कर ली दूसरी शादी, सरकारी योजना का लाभ लेने का आरोप, FIR दर्ज

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले से सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए नियमों को ताक पर रखने और धोखाधड़ी करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां 'मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना' के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता हड़पने के लिए एक व्यक्ति ने अपनी पहली शादी छिपाकर सामूहिक विवाह कार्यक्रम में दूसरी शादी रचा ली।

By Sushil Sah 
Updated Date

पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले से सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए नियमों को ताक पर रखने और धोखाधड़ी करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां ‘मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना’ के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता हड़पने के लिए एक व्यक्ति ने अपनी पहली शादी छिपाकर सामूहिक विवाह कार्यक्रम में दूसरी शादी रचा ली। इस चालबाजी की भनक जब पहली पत्नी को लगी, तो उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी पति समेत छह लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है।

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पहली पत्नी ने खोला राज

शिकायतकर्ता पीलीभीत के ग्राम मडरिया निवासी गीता देवी ने पुलिस को बताया कि उसकी शादी 24 अप्रैल 2021 को बरेली के क्योलड़िया निवासी ‘कुमार’ के साथ हुई थी, जिससे उनका एक बेटा भी है। गीता ने आरोप लगाया है कि उसके पति कुमार ने बिना किसी कानूनी तलाक के, खुद को अविवाहित बताते हुए फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इसके बाद आरोपी ने 12 नवंबर को पीलीभीत के ड्रमंड राजकीय इंटर कॉलेज में आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह में सुमन नामक महिला से दूसरी शादी कर ली।

इन धाराओं में केस दर्ज, होगी ₹1 लाख की वसूली

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस मामले के सामने आने के बाद न्यूरिया थाना पुलिस ने आरोपी पति कुमार, उसके माता-पिता और दूसरी पत्नी व उसके माता-पिता सहित कुल छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस ने यह कार्रवाई भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) यानी धोखाधड़ी और धारा 82(1) यानी पति/पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी करने के तहत की है। पीलीभीत के मुख्य विकास अधिकारी सतीश प्रसाद मिश्रा ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि पुलिस जांच और चार्जशीट दाखिल होने के बाद आरोपी परिवार से ₹1 लाख की पूरी सरकारी सहायता राशि वापस वसूली जाएगी।

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क्या है योजना और क्यों हुआ फर्जीवाड़ा?

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार की ‘मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना’ के तहत गरीब परिवारों की बेटियों की शादी के लिए प्रति जोड़ा कुल ₹1,00,000 की वित्तीय सहायता दी जाती है। इस राशि में से ₹64,000 सीधे वधू के बैंक खाते में भेज दिए जाते हैं। इसके अलावा ₹21,000 मूल्य की गृहस्थी सामग्री यानी कि उपहार दी जाती है और ₹15,000 विवाह आयोजन के खर्च के लिए तय होते हैं। आरोपी ने इसी सरकारी धन का गबन करने के लिए प्रशासन को धोखा देने की कोशिश की थी।

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