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अमेरिका-भारत व्यापार समझौते में मोदी सरकार ने देश और किसानों की बलि दे दी: रणदीप सिंह सुरजेवाला

अमेरिका-भारत व्यापार समझौते में मोदी सरकार ने देश और किसानों की बलि दे दी। भारत की ऊर्जा सुरक्षा से सरेआम खिलवाड़ किया। मोदी सरकार ने भारत की डिजिटल स्वायत्तता व डेटा प्राइवेसी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। भारतीय हितों की रक्षा में मजबूती से खड़े होने के बजाए इस मजबूर सरकार ने भारत की संप्रभुता और आत्मनिर्भरता से समझौता कर लिया।

By शिव मौर्या 
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नई दिल्ली। कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोमवार को कांग्रेस कार्यालय में प्रेस कॉफ्रेंस किया। इस दौरान उसने कहा कि, व्यापार समझौते आर्थिक तरक्की का रास्ता होते हैं। व्यापार समझौतों का आधार ही दो देशों की बराबरी की शर्तों पर परस्पर लोकहित है। व्यापार समझौते देश की संप्रभुता को त्याग कर, गुलामी का रास्ता कभी नहीं हो सकते। व्यापार समझौतों की आड़ में देशहित और लोकहित दोनों की बलि नहीं दी जा सकती। इन्हीं वजहों के चलते हम अंग्रेजों से भी लड़े थे।

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उन्होंने आगे कहा कि, अमेरिका-भारत व्यापार समझौते में मोदी सरकार ने देश और किसानों की बलि दे दी। भारत की ऊर्जा सुरक्षा से सरेआम खिलवाड़ किया। मोदी सरकार ने भारत की डिजिटल स्वायत्तता व डेटा प्राइवेसी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। भारतीय हितों की रक्षा में मजबूती से खड़े होने के बजाए इस मजबूर सरकार ने भारत की संप्रभुता और आत्मनिर्भरता से समझौता कर लिया।

साथ ही कहा, मोदी सरकार ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील में भारत के हित को दांव पर लगा दिया है। जिसमें तीन मुद्दे सबसे जरूरी हैं, खेती, ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार की शर्त…6 फरवरी, 2026 के पहले फ्रेमवर्क एग्रीमेंट में ही सहमति जताई गई है कि भारत बिना किसी आयात शुल्क के अमेरिका के खाद्य व कृषि उत्पादों के लिए हमारा बाजार खोल देगा।

रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आगे कहा कि, व्यापार समझौते का बड़ा प्रभाव “कपास” पैदा करने वाले किसानों पर पड़ेगा। अमेरिका ने बांग्लादेश से एक व्यापार समझौता किया, उसमें साफ-साफ लिखा है कि बांग्लादेश, अमेरिकी कपास व धागा आयात कर जो कपड़ा व वस्त्र अमेरिका को निर्यात करेगा, उस पर अमेरिका में 0% शुल्क लगेगा।

इसके उलट, हमारे यानी भारत के निर्यात पर 18% शुल्क लगेगा, जबकि भारत कपड़ा व वस्त्र का सबसे बड़ा निर्यातक है। ऐसा हुआ तो इसका असर तिरुपुर, सूरत, पानीपत, लुधियाना समेत पूरे देश के वस्त्र उद्योग पर पड़ेगा। मगर 12 फरवरी, 2026 को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सार्वजनिक तौर से देश को बताया कि भारत भी अमेरिका से कपास आयात कर जो कपड़ा वा वस्त्र निर्यात करेगा, उसे भी बांग्लादेश के बराबर राहत मिलेगी।

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यानी अब अमेरिकी कपास के भारत में निशुल्क आयात का दरवाजा भी मोदी सरकार ने खोल दिया है। इसके अलावा- बांग्लादेश, भारत से करीब 50% कपास आयात करता है। मगर अब कपास का भारत से बांग्लादेश को निर्यात भी बंद हो जाएगा, जो कि हमारे किसान पर दोहरी मार होगी। उन्होंने आगे कहा, पीयूष गोयल भले न बता रहे हों लेकिन मोदी सरकार ने समझौते से पहले ही अमेरिका से भारत में कपास का आयात शुरू कर दिया था।

रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, आंकड़ों के मुताबिक-भारत ने कपास होते हुए भी साल 2024-25 में अमेरिका से ₹3,428 करोड़ का कपास आयात कर लिया है। अगर ये आंकड़ा ₹3,428 करोड़ से बढ़कर ₹20,000 करोड़ हो जाएगा तो हमारे कपास का क्या होगा? इस साल भारत में कपास की MSP ₹6100 प्रति क्विंटल थी, लेकिन कपास ₹5045 प्रति क्विंटल की कीमत पर बिका। सवाल है-अगर अमेरिकी कपास का आयात होगा, तो महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक के कपास पैदा करने वाले किसानों का क्या होगा?

 

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