भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे विवाद और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR पर अब सत्तारूढ़ NDA के भीतर से भी चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग सामने आई है। केंद्रीय मंत्री और जनता दल नेता एच.डी. कुमारस्वामी ने आज 26 सितंबर को कहा कि चुनाव आयोग को खुद सामने आकर यह बताना चाहिए कि उसके भीतर असल में क्या चल रहा है।
नई दिल्ली। भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे विवाद और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR पर अब सत्तारूढ़ NDA के भीतर से भी चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग सामने आई है। केंद्रीय मंत्री और जनता दल नेता एच.डी. कुमारस्वामी ने आज 26 सितंबर को कहा कि चुनाव आयोग को खुद सामने आकर यह बताना चाहिए कि उसके भीतर असल में क्या चल रहा है।
कुमारस्वामी ने क्या कहा?
पत्रकारों से बातचीत के दौरान बेंगलुरु में कुमारस्वामी ने कहा कि यह केवल किसी राजनीतिक दल या नेता की मांग का सवाल नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह अपने बारे में सामने आई खबरों पर सभी सही तथ्यों को स्पष्ट करे। इसके अलावा उन्होंने ये भी सवाल उठाया कि आखिर “ग्राउंड रियलिटी” क्या है और चुनाव आयोग के अंदर वास्तव में क्या हो रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि मीडिया में सामने आई खबरों और आयोग के अंदर की वास्तविक स्थिति के बीच अंतर को स्पष्ट करना बेहद जरूरी है।
SIR विवाद की पृष्ठभूमि क्या है?
आपको बता दें कि यह पूरा विवाद The Indian Express की उस जांच रिपोर्ट के बाद तेज हुआ, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट में इन आपत्तियों को नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और चुनावी डेटा के डिजिटल प्रबंधन जैसे मुद्दों से जोड़ा गया है। इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा Form 6 को लेकर हुई। रिपोर्ट के अनुसार, SIR प्रक्रिया के दौरान नए मतदाता पंजीकरण से जुड़े फॉर्म के साथ अतिरिक्त घोषणा को लेकर दोनों चुनाव आयुक्तों ने सवाल उठाए थे। साथ ही ECINet और मतदाता डेटा के केंद्रीकरण को लेकर भी आपत्तियों की बात सामने आई है।
फिर भारत निर्वाचन आयोग का क्या कहना है?
चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के बाद कहा कि किसी बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में अधिकारियों या आयुक्तों की ओर से तकनीकी टिप्पणियां, सवाल और सुझाव देना सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है। भारत निर्वाचन आयोग का आधिकारिक रुख यह है कि SIR से जुड़े अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए थे। यानी आयोग आंतरिक विचार-विमर्श में मतभेद की संभावना को अलग बात मानता है, लेकिन अंतिम निर्णयों को सर्वसम्मत बताता है।
NDA के भीतर से आवाज क्यों महत्वपूर्ण है?
कुमारस्वामी का बयान इसलिए चर्चा में है क्योंकि वह केंद्र की NDA सरकार में केंद्रीय मंत्री हैं और उनकी पार्टी JD(S) NDA का हिस्सा है। इसलिए उनका यह कहना कि चुनाव आयोग को SIR और कथित आंतरिक मतभेदों पर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, इस विवाद को एक नया राजनीतिक मोड़ देता है। हालांकि, कुमारस्वामी ने अपने बयान में ECI या CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया।
NDA के अन्य नेताओं ने भी उठाए सवाल
कुमारस्वामी से एक दिन पहले LJP के चिराग पासवान, RLM के उपेंद्र कुशवाहा और TDP के चंद्रबाबू नायडू की ओर से भी SIR और उससे जुड़ी चिंताओं पर चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण की मांग किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। इस बीच विपक्षी दलों ने भी ECI की कार्यप्रणाली और CEC ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए हैं। वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग लगातार यह कह रहा है कि उसके अंतिम SIR फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
इसी वजह से फिलहाल विवाद का केंद्र भी यही बना हुआ है। एक तरफ दो चुनाव आयुक्तों की कथित रिकॉर्डेड आपत्तियों की रिपोर्ट है तो दूसरी तरफ ECI का सर्वसम्मति वाला आधिकारिक पक्ष है। वर्तमान में NDA के भीतर से भी चुनाव आयोग से इस पूरे मामले पर स्पष्ट सार्वजनिक जवाब देने की मांग की गई है।