यह तिथि वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है, जिसे पूरे दिन 'स्वयं सिद्ध मुहूर्त' माना जाता है। युगों का प्रारंभ: पौराणिक कथाओं के अनुसार, अक्षय तृतीया पर ही सतयुग का समापन होकर त्रेतायुग का आगाज़ हुआ था।
Akshaya Tritiya Tretayuga begins : यह तिथि वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है, जिसे पूरे दिन ‘स्वयं सिद्ध मुहूर्त’ माना जाता है। युगों का प्रारंभ: पौराणिक कथाओं के अनुसार, अक्षय तृतीया पर ही सतयुग का समापन होकर त्रेतायुग का आगाज़ हुआ था। इस युग में अधर्म के विनाश के लिए भगवान विष्णु ने वामन, परशुराम और श्री राम अवतार लिए। सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार चार युगों के बारे में बताया गया है। जो सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलयुग है। वर्तमान समय में कलयुग चल रहा है। ऐसा माना जाता है कि जब- जब धरती पर पाप अधिक बढ़ जाता है। तब- तब भगवान विष्णु का अवतार होता है। पापियों का नाश करने के बाद एक नये युग की शुरुआत होती है। साल 2026 में अक्षय तृतीया (आखा तीज) मुख्य रूप से 19 अप्रैल, रविवार को मनाई जाएगी। यह दिन अबूझ मुहूर्त (बिना मुहूर्त के शुभ कार्य) माना जाता है।
भगवान विष्णु का राम अवतार
त्रेतायुग की शुरुआत भगवान विष्णु के राम अवतार में आने से मानी जाती है। इस युग में भगवान ने वामन और राम के रूप में अवतार लिया। इसके साथ ही परशुराम के रूप में अंश अवतार लिया। इस युग की काल अवधि 3600 दिव्य वर्ष मानी जाती है। अर्थात् 1296000 मानव वर्ष मानी जाती है। मान्याताओं के अनुसार इस युग में मनुष्य का जीवन काल 10000 वर्ष मानी जाती थी। इस युग में पाप की मात्र 25 प्रतिशत तक बढ़ गई थी और पुण्य केवल 75 प्रतिशत ही था। त्रेतायुग में रावण, कुंभकरण और बालि जैसे दानव का वध राम जी ने किया। राम जी के देह त्यागने के बाद फिर एक बार नये युग का आंरभ हुआ।