ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य का युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि ऊर्जा और व्यापारिक मार्गों पर लड़ा जाएगा। यह हमला केवल मिसाइल ठिकानों पर नहीं, बल्कि ईरान की उस क्षेत्रीय शक्ति पर प्रहार है जिसने दशकों से पश्चिमी देशों को चुनौती दी थी।
Operation Epic Fury: ईरान दुनिया की 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति वाली होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के बाद, अमेरिका ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत अब तक का सबसे घातक पलटवार किया है। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को सुरक्षित करने के लिए अमेरिकी B-2 हमलावर विमानों ने ईरान के उन तटीय इलाकों को निशाना बनाया जहां से व्यापारिक जहाजों पर मिसाइलें दागने का खतरा था।
इस हमले में अत्याधुनिक GBU-72 Advanced 5K Penetrator (बंकर बस्टर) बमों का इस्तेमाल किया गया, जो जमीन के नीचे छिपे कंक्रीट के मजबूत बंकरों को भेदने में सक्षम हैं। इस सैन्य कार्रवाई ने जहां एक ओर वैश्विक व्यापार मार्ग को बहाल करने की कोशिश की है, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका पैदा कर दी है।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य का युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि ऊर्जा और व्यापारिक मार्गों पर लड़ा जाएगा। यह हमला केवल मिसाइल ठिकानों पर नहीं, बल्कि ईरान की उस क्षेत्रीय शक्ति पर प्रहार है जिसने दशकों से पश्चिमी देशों को चुनौती दी थी।
बता दें कि, ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहा युद्ध अब और ज्यादा भयावक हो चुका है। ईरान के सुप्रीम लीडर ने साफ कर दिया है कि, ये युद्ध इतनी जल्दी समाप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि, जब तक अमेरिका और इजरायल को हरायेंगे नहीं तब तक युद्ध जारी रहेगा। इसको लेकर अब साफ है कि, ये युद्ध अभी और ज्यादा दिनों तक चलेगा। वहीं, इजरायल और अमेरिका की तरफ से भी ताबड़तोड़ ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले किए जा रहे हैं।
रिपोर्ट- सुशील कुमार साह