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सोनौली: छठवीं पुण्यतिथि पर भावुक हुआ नगर, सुधीर त्रिपाठी की याद में नम हुईं आंखें

सोनौली: छठवीं पुण्यतिथि पर भावुक हुआ नगर, सुधीर त्रिपाठी की याद में नम हुईं आंखें

पर्दाफाश न्यूज़ ब्यूरो महराजगंज :: जिस शख्स ने सोनौली के विकास का सपना देखा, उसे आकार देने के लिए संघर्ष किया और नगर को नई पहचान दिलाने में अपना जीवन समर्पित कर दिया, आज उसकी याद में पूरा सोनौली भावुक है। आदर्श नगर पंचायत सोनौली के सृजनकर्ता के रूप में अपनी अलग पहचान बनाने वाले स्वर्गीय सुधीर त्रिपाठी की छठवीं पुण्यतिथि पर बुधवार को नगरवासियों ने उन्हें श्रद्धा और भावुकता के साथ याद किया।

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9 सितंबर 2020 को सुधीर त्रिपाठी के असामयिक निधन ने सोनौली की राजनीति और सामाजिक जीवन में एक ऐसा खालीपन पैदा किया, जिसकी भरपाई आज तक नहीं हो सकी। उनके निधन के छह वर्ष बाद भी नगर के लोगों के बीच उनकी स्मृतियां उतनी ही जीवंत हैं।

व्यापारी, समाजसेवी, जनप्रतिनिधि, पत्रकार और उनके समर्थक आज भी उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।

सोनौली के विकास की राजनीति में एक अलग अध्याय थे सुधीर त्रिपाठी

सुधीर त्रिपाठी केवल एक जनप्रतिनिधि या राजनीतिक व्यक्तित्व नहीं थे, बल्कि सोनौली के विकास को लेकर एक स्पष्ट सोच रखने वाले व्यक्ति के रूप में उन्हें याद किया जाता है। नगर के विकास, जनसमस्याओं और स्थानीय लोगों के हितों को लेकर उनकी सक्रियता ने उन्हें आम लोगों के बीच मजबूत पहचान दिलाई।

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उनके समर्थकों का कहना है कि सुधीर त्रिपाठी की राजनीति का केंद्र सत्ता नहीं, बल्कि सोनौली और यहां की जनता थी। यही कारण है कि उनके जाने के वर्षों बाद भी उनकी चर्चा राजनीतिक गलियारों से लेकर आम लोगों के बीच होती है।

आज भी महसूस होती है उनकी कमी

पुण्यतिथि पर नगर के विभिन्न स्थानों पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान लोगों की आंखें नम नजर आईं। श्रद्धांजलि देने पहुंचे लोगों ने कहा कि सुधीर त्रिपाठी भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन सोनौली के विकास को लेकर उनके विचार और जनसेवा की उनकी सोच आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है।

कई लोगों ने भावुक होकर कहा कि किसी व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि उसके जाने के बाद लोगों के दिलों में बची जगह से होती है। सुधीर त्रिपाठी आज भी सोनौलीवासियों की स्मृतियों में उसी आत्मीयता के साथ मौजूद हैं।

पुण्यतिथि बनी राजनीतिक और सामाजिक स्मृति का दिन

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हर वर्ष उनकी पुण्यतिथि पर जिस तरह से अलग-अलग वर्गों के लोग उन्हें याद करते हैं, उससे साफ है कि सुधीर त्रिपाठी की विरासत केवल किसी एक राजनीतिक दल, वर्ग या संगठन तक सीमित नहीं रही। उनके समर्थकों और शुभचिंतकों के लिए यह दिन सिर्फ पुण्यतिथि नहीं, बल्कि सोनौली के विकास के उस दौर को याद करने का अवसर है, जब नगर को लेकर बड़े सपने देखे गए थे।

आज जब सोनौली विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है, ऐसे समय में सुधीर त्रिपाठी की याद और भी गहरी हो जाती है। उनके समर्थकों का मानना है कि उनके द्वारा देखे गए विकास के सपनों को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

छह वर्ष बीत गए, वक्त बदल गया, राजनीतिक परिस्थितियां बदल गईं, लेकिन सोनौली के लोगों के दिलों में सुधीर त्रिपाठी की याद आज भी कायम है। यही किसी जननेता की सबसे बड़ी विरासत मानी जाती है।

पर्दाफाश न्यूज़ परिवार स्वर्गीय सुधीर त्रिपाठी की छठवीं पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन एवं भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करता है। उनकी जनसेवा, संघर्ष और सोनौली के विकास के प्रति समर्पण को सदैव स्मरण किया जाता रहेगा।

महराजगंज ब्यूरो प्रभारी विजय चौरसिया की रिपोर्ट

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