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शराब खरीदने वालों की उम्र जांच के लिए बनाए ठोस नीति, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को जारी किया नोटिस

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को शराब की दुकानों में खरीदारों की उम्र की जांच की मांग वाली एक याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। दरअसल, याचिका में कहा गया है कि शराब खरीदने के लिए जाने वाले लोगों की उम्र की सीमा तय है और इसलिए इससे जुड़े नियम सख्ती से लागू होने चाहिए।

By santosh singh 
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को शराब की दुकानों में खरीदारों की उम्र की जांच की मांग वाली एक याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। दरअसल, याचिका में कहा गया है कि शराब खरीदने के लिए जाने वाले लोगों की उम्र की सीमा तय है और इसलिए इससे जुड़े नियम सख्ती से लागू होने चाहिए। याचिका में शराब की दुकानों में उम्र की जांच के लिए एक ठोस नीति भी बनाई जानी चाहिए।

याचिका में कहा गया कि अलग-अलग राज्यों की आबकारी नीति में उम्र को लेकर कानून हैं। इसके तहत एक तय उम्र तक लोगों का शराब लेना अवैध है, लेकिन शराब की दुकानों में इसे लेने जाने वालों की उम्र की जांच के लिए ठोस प्रणाली नहीं है।

जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथ की बेंच के सामने पेश हुई इस याचिका में शराब की घर पर डिलीवरी का भी विरोध किया गया है। इसमें कहा गया है कि इससे कम उम्र के लोगों में शराब का उपभोग करने की आदत में बढ़ोतरी होगी। एनजीओ कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंकेन ड्राइविंग (NGO Community Against Drunken Driving) के वकील ने दलील दी कि शराब की दुकानों, बार, पब, आदि में लोगों की उम्र की जांच के लिए प्रणाली या व्यवस्था नहीं है। इसलिए एक मजबूत नीति शराब पीकर गाड़ी चलाने की घटनाओं को कम करेगी और कम उम्र के लोगों को शराब की पहुंच से दूर रखेगी।

याचिकाकर्ता ने कहा कि जो लोग नाबालिगों को शराब बेचते हैं। शराब परोसते हैं या मुहैया कराते हैं। उन पर 50,000 रुपये का जुर्माना या तीन महीने की जेल या दोनों के प्रावधान होने चाहिए। इस याचिका में केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उत्तरदाता बनाने की मांग की गई है।

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