राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Droupadi Murmu) ने 80वें स्वतंत्रता दिवस (80th Independence Day) की पूर्व संध्या पर देश को संबोधित करते हुए देश-विदेश के भारतीयों को बधाई दी। स्वतंत्रता के 80वें वर्ष के आगाज पर हर नागरिक से देश की प्रगति और तरक्की में योगदान देने का आह्वान किया।
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Droupadi Murmu) ने 80वें स्वतंत्रता दिवस (80th Independence Day) की पूर्व संध्या पर देश को संबोधित करते हुए देश-विदेश के भारतीयों को बधाई दी। स्वतंत्रता के 80वें वर्ष के आगाज पर हर नागरिक से देश की प्रगति और तरक्की में योगदान देने का आह्वान किया। 15 अगस्त 1947 के दिन भारतमाता पराधीनता की बेड़ियों से मुक्त हुईं। सभी देशवासी, स्वतंत्र भारत की नियति के निर्माता बने।
राष्ट्रपति ने कहा कि देश और दुनिया भर में रहने वाले सभी भारतीय इस पावन अवसर को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि हम भारत के लोग अपने-अपने सपनों को साकार करें और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि भारत की निरंतर प्रगति और तरक्की में योगदान देना ही हमारी स्वतंत्रता की सच्ची सार्थकता है। देश के हर नागरिक का योगदान भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का काम करेगा।
LIVE: President Droupadi Murmu's address to the nation on the eve of the 80th Independence Day https://t.co/0EZ6TLdoM9
— President of India (@rashtrapatibhvn) August 14, 2026
आधुनिक भारत के शिल्पकार लौहपुरुष की स्मृति को किया नमन
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि जब देश आजाद हुआ तब 550 से ज्यादा रियासतों को भारत से जोड़ना चुनौती थी। सरदार पटेल ने उनका विलय किया। आधुनिक भारत के शिल्पकार लौहपुरुष की स्मृति को मैं नमन करती हूं। निष्ठावान विद्यार्थी और शिक्षक, विकास के लिए तत्पर वैज्ञानिक और इंजीनियर, स्वास्थ्य सेवा में कार्यरत डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी, मेहनती श्रमिक और अन्नदाता किसान, अपने प्रयासों से राष्ट्र-निर्माण कर रहे हैं। अन्य क्षेत्रों में सक्रिय, असंख्य देशवासी, तथा संविधान में निहित, मूल कर्तव्यों का पालन करने वाले सभी नागरिक, राष्ट्र-निर्माण में महत्वपूर्ण भागीदार हैं। मैं उन सभी की हृदय से सराहना करती हूं।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि अपनी समृद्ध विरासत और स्वाधीनता संग्राम के आदर्शों को अपनाते हुए हम आधुनिक विकास के मार्ग पर अग्रसर हैं। ‘वयं राष्ट्रे जागृयाम’, यह वेद-वाक्य हमें प्रेरणा देता है कि हम राष्ट्र के लिए सदैव जागरूक रहें। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नेतृत्व में अनगिनत देशवासी स्वाधीनता संग्राम से जुड़ गए। बाबासाहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने समाज सुधार तथा राष्ट्र-निष्ठा के उच्च आदर्श प्रस्तुत किए। भारतमाता की उन सभी महान संतानों को मैं सादर नमन करती हूं जिनके आदर्शों पर चलते हुए हमारा देश स्वतंत्र हुआ और आगे बढ़ा। आज 14 अगस्त के दिन को हम विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाते हैं। सांप्रदायिक हिंसा की वजह से लाखों लोगों को शरणार्थी बनना पड़ा और बंटवारे की विभीषिका सहन करनी पड़ी। फिर भी, उन्होंने अपनी पहचान नहीं छोड़ी। लोकतन्त्र की जननी भारतभूमि के निवासियों में जनभागीदारी की भावना सदा से विद्यमान रही है। उस भावना को, नई ऊर्जा के साथ, हमारे देशवासी आगे बढ़ा रहे हैं।
सत्य और न्याय के पक्ष में, मानवता विरोधी शक्तियों पर विजय प्राप्त करने की भारतीय परंपरा पर हम गर्व करते हैं। भारत को नक्सल मुक्त बनाना एक बड़ी उपलब्धि है। अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उत्साह का वातावरण है तथा विकास की सर्वस्पर्शी धारा प्रवाहित हो रही है। बस्तर ओलिंपिक्स में खिलाड़ियों ने, बस्तर पंडुम में कलाकारों ने, तथा इन आयोजनों में दर्शकों ने, भारी संख्या में हिस्सा लिया। सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। वरिष्ठ नागरिकों के प्रति अपनेपन की भावना तथा उनके आत्मसम्मान को बनाए रखने के लिए पूरे समाज को संवेदनशील रहना चाहिए। खेलकूद को बढ़ावा देने के लिए सरकार अभूतपूर्व निवेश कर रही है। इन प्रयासों के अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतिस्पर्धाओं में हमारे खिलाड़ी प्रदर्शन और उपलब्धियों के ऊंचे शिखरों तक पहुंच रहे हैं।