1. हिन्दी समाचार
  2. एस्ट्रोलोजी
  3. Rudrashtakam Mystery :  क्या आप भी जानते हैं शिव रुद्राष्टकम का असली रहस्य और इसका प्रभाव ?, चमत्कारिक मंत्र के पाठ से कटते हैं कष्ट

Rudrashtakam Mystery :  क्या आप भी जानते हैं शिव रुद्राष्टकम का असली रहस्य और इसका प्रभाव ?, चमत्कारिक मंत्र के पाठ से कटते हैं कष्ट

शिव रुद्राष्टकम स्वामी तुलसीदास द्वारा रचित भगवान शिव की स्तुति का एक अत्यंत शक्तिशाली 8-श्लोकों का स्तोत्र है, जिसका वर्णन श्रीरामचरितमानस के उत्तरकांड में मिलता है।

By अनूप कुमार 
Updated Date

Rudrashtakam Mystery :  शिव रुद्राष्टकम स्वामी तुलसीदास द्वारा रचित भगवान शिव की स्तुति का एक अत्यंत शक्तिशाली 8-श्लोकों का स्तोत्र है, जिसका वर्णन श्रीरामचरितमानस के उत्तरकांड में मिलता है। यह एक चमत्कारिक मंत्र पाठ है। रामचरितमानस के अनुसार जब भगवान श्रीराम को रावण जैसे शत्रु पर विजय पानी थी तब श्रीराम ने रामेश्वरम में शिवलिंग स्थापित कर इसी रुद्राष्टकम का श्रध्दापूर्वक पाठ किया था, तब शिव जी ने श्रीराम पर अपनी कृपा की जिससे उन्होंने रावण पर विजयी प्राप्त की।
यह केवल एक स्तुति नहीं, बल्कि एक गहन आध्यात्मिक अनुभव है, जिसे श्रद्धा से पढ़ने या सुनने पर मन को शांति और ऊर्जा मिलती है।

पढ़ें :- Surya Grahan 2026: अगस्त में इस तारीख को लगेगा सूर्य ग्रहण, करें ये काम

आइए जानते हैं इसका मतलब:
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं
विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं
चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहं।।1।।
हे भगवान! मैं मुक्तिस्वरूप, समर्थ, सर्वव्यापक, ब्रह्म, वेदस्वरूप, निज स्वरूप में स्थित, निर्गुण, निर्विकल्प, निरीह, अनन्त ज्ञानमय और आकाश के समान सर्वत्र व्याप्त प्रभु को प्रणाम करता हूं।

निराकारमोङ्करमूलं तुरीयं
गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम्
करालं महाकालकालं कृपालं
गुणागारसंसारपारं नतोहम्।।2।।
जो निराकार हैं, ओंकाररूप आदिकारण हैं, तुरीय हैं, वाणी, बुद्धि और इन्द्रियों के पथ से परे हैं, कैलासनाथ हैं, विकराल और महाकाल के भी काल, कृपाल, गुणों के आगार और संसार से तारने वाले हैं, उन भगवान को मैं नमस्कार करता हूं ।

तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभिरं
मनोभूतकोटिप्रभाश्री शरीरम् ।
स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगङ्गा
लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा।।3।।
जो हिमालय के समान श्वेतवर्ण, गम्भीर और करोड़ों कामदेवों के समान कान्तिमान शरीर वाले हैं, जिनके मस्तक पर मनोहर गंगाजी लहरा रही हैं, भाल देश में बाल-चन्द्रमा सुशोभित होते हैं और गले में सर्पों की माला शोभा देती है।

चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं
प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं
प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि।।4।।
जिनके कानों में कुण्डल हिल रहे हैं, जिनके नेत्र एवं भृकुटि सुन्दर और विशाल हैं, जिनका मुख प्रसन्न और कण्ठ नील है, जो बड़े ही दयालु हैं, जो बाघ के चर्म का वस्त्र और मुण्डों की माला पहनते हैं, उन सर्वाधीश्वर प्रियतम शिव का मैं भजन करता हूं।

पढ़ें :- Sawan Mangala Gauri Vrat 2026 : सावन के पहले मंगला गौरी व्रत पर बन रहे हैं 3 शुभ योग, जानिए पूजा का सही समय और खास नियम

प्रचंडं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं
अखंडं अजं भानुकोटिप्रकाशं।
त्रयः शूल निर्मूलनं शूलपाणिं
भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यं।।5।।
जो प्रचण्ड, सर्वश्रेष्ठ, प्रगल्भ, परमेश्वर, पूर्ण, अजन्मा, कोटि सूर्य के समान प्रकाशमान, त्रिभुवन के शूलनाशक और हाथ में त्रिशूल धारण करने वाले हैं, उन भावगम्य भवानीपति का मैं भजन करता हूं।

कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी
सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी।
चिदानन्द संदोह मोहापहारी
प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी।।6।।
हे प्रभो! आप कलारहित, कल्याणकारी और कल्प का अंत करने वाले हैं। आप सर्वदा सत्पुरुषों को आनन्द देते हैं, आपने त्रिपुरासुर का नाश किया था, आप मोहनाशक और ज्ञानानन्दघन परमेश्वर हैं, कामदेव के शत्रु हैं, आप मुझ पर प्रसन्न हों, प्रसन्न हों।

न यावद् उमानाथ पादारविन्दं
भजंतीह लोके परे वा नराणां।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं
प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं।।7।।
मनुष्य जब तक उमाकान्त महादेव जी के चरणारविन्दों का भजन नहीं करते, उन्हें इहलोक या परलोक में कभी सुख तथा शान्ति की प्राप्ति नहीं होती और न उनका सन्ताप ही दूर होता है। हे समस्त भूतों के निवास स्थान भगवान शिव! आप मुझ पर प्रसन्न हों।

न जानामि योगं जपं नैव पूजां
नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यं।
जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो।।8।।
हे प्रभो! हे शम्भो! हे ईश! मैं योग, जप और पूजा कुछ भी नहीं जानता, हे शम्भो! मैं सदा-सर्वदा आपको नमस्कार करता हूं। जरा, जन्म और दुःख समूह से सन्तप्त होते हुए मुझ दुःखी की दुःख से रक्षा कीजिए।

रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये।
ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति।।
जो मनुष्य भगवान शंकर की तुष्टि के लिए ब्राह्मण द्वारा कहे हुए इस रुद्राष्टक का भक्तिपूर्वक पाठ करते हैं, उन पर शंकरजी प्रसन्न होते हैं।

पढ़ें :- 02 अगस्त 2026 का राशिफल: इन राशि के लोगों को रविवार के दिन मिलेगी सफलता, रुके हुए कार्य होंगे पूरे

शिव रुद्राष्टकम केवल एक स्तोत्र नहीं, बल्कि भगवान शिव से जुड़ने का एक सरल और प्रभावी माध्यम है।
यदि इसे श्रद्धा और समझ के साथ पढ़ा जाए, तो यह जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।

रिपोर्ट: कौशिकी गुप्ता

 

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...