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CUET NEET Candidates Data Leak : देश में कौड़ियों के भाव बिक रही है CUET-NEET छात्रों की ‘कुंडली’, पेपर के बाद अब डेटा लीक!

देश में परीक्षा कराने वाली एजेंसियों और अभ्यर्थियों के डेटा लीक (Candidates Data Leak) सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पेपर लीक के विवादों के बीच चौंकाने वाला मामला आया हैं। राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं में बैठने वाले लाखों स्टूडेंट्स का पर्सनल डेटा इंटरनेट पर बेचा जा रहा है।

By santosh singh 
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नई दिल्ली। देश में परीक्षा कराने वाली एजेंसियों और अभ्यर्थियों के डेटा लीक (Candidates Data Leak) सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पेपर लीक के विवादों के बीच चौंकाने वाला मामला आया हैं। राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं में बैठने वाले लाखों स्टूडेंट्स का पर्सनल डेटा इंटरनेट पर बेचा जा रहा है। नीट और सीयूईटी CUET-NEET जैसी परीक्षाओं के उम्मीदवारों के नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल और माता-पिता के नाम जैसी गोपनीय जानकारियां कुछ वेबसाइट्स पर कौड़ियों के भाव उपलब्ध हैं।

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देश में ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन’ (DPDP) एक्ट लागू किया जा रहा है। ऐसे में इस अवैध कारोबार ने स्टूडेंट प्राइवेसी सुरक्षा को लेकर बहस छेड़ दी है। ये वेबसाइट्स प्राइवेट यूनिवर्सिटी और एडमिशन कंसल्टेंट्स को डेटा बेच रही हैं, जिससे वे स्टूडेंट्स को एडमिशन के लिए टारगेट कर सकें। डेटा बेचने वाली कंपनियां इसे जायज बता रही हैं, वहीं हर दिन आने वाले अनचाहे कॉल्स और मेसेज ने स्टूडेंट्स और उनके पेरेंट्स की नींद उड़ा रखी है। जानिए प्राइवेसी में सेंधमारी का यह खेल आखिर कैसे चल रहा है।

1000 से 10000 रुपये में बिक रही है पूरी कुंडली

इंटरनेट पर एक्टिव कुछ प्रमुख वेबसाइट्स (जैसे studentdataprovider.com, studentsdatabases.com और bulkstudentdata.com) स्टूडेंट्स के डेटा का बाजार सजाए बैठी हैं। यहां डेटा के साइज और स्टूडेंट्स के राज्यों/शहरों के हिसाब से कीमतें तय की गई हैं, जो महज 1,000 से शुरू होकर 10,000 रुपये तक जाती हैं। एडमिशन सीजन में ज्यादा से ज्यादा बच्चों को अपने जाल में फंसाने के लिए कॉलेज और कंसल्टेंट्स इन वेबसाइट्स से थोक के भाव में डेटा खरीद रहे हैं।

दांव पर है 15 लाख से ज्यादा CUET स्टूडेंट्स का डेटा

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हद तो तब हो गई जब studentdataprovider.com नाम की वेबसाइट पर “CUET-2026 एग्जाम डेटाबेस” नाम से लिस्टिंग लाइव कर दी गई। इस डेटाबेस में सीयूईटी परीक्षा देने वाले 15 लाख से भी अधिक कैंडिडेट्स का पूरा रिकॉर्ड होने का दावा किया गया है। इतना ही नहीं, ग्राहकों को भरोसा दिलाने के लिए वेबसाइट ने 500 स्टूडेंट्स का डेटा ‘फ्री सैंपल’ के तौर पर भी शेयर किया है, जिसमें उनके एप्लिकेशन नंबर से लेकर जन्मतिथि, जेंडर और कोटा कैटेगरी तक की जानकारियां साफ देखी जा सकती हैं।

नए DPDP कानून की उड़ीं धज्जियां, भारी जुर्माने का है प्रावधान

स्टूडेंट्स के डेटा की खुलेआम सेल देश के नए डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट के इरादों को ठेंगा दिखा रही है। इस कानून के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति का पर्सनल डेटा उसकी मर्जी या सहमति के बिना किसी दूसरे काम के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. कानून में इस तरह के उल्लंघन पर 250 करोड़ रुपये तक के भारी-भरकम जुर्माने का प्रावधान है, हालांकि, इस कानून के सख्त नियम साल 2027 से लागू होने हैं। शायद इसीलिए ये डेटा चोर अभी बेखौफ घूम रहे हैं।

NTA का पल्ला झाड़ना और डेटा कंपनियों की अजीब दलील

इस मामले पर जब बवाल बढ़ा तो नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अपनी सफाई में कहा कि वे कैंडिडेट्स की प्राइवेसी को सबसे ऊपर रखते हैं। एनटीए का दावा है कि वे यूनिवर्सिटी के साथ रिजल्ट केवल सुरक्षित और सरकारी डिजीलॉकर (DigiLocker) या API प्लेटफॉर्म के जरिए ही शेयर करते हैं। दूसरी तरफ, दिल्ली की ‘बल्क स्टूडेंट्स डेटा’ जैसी कंपनियां इस धंधे को सही ठहराते हुए कह रही हैं कि मार्केटिंग के लिए इस डेटा का इस्तेमाल करना गैर-कानूनी नहीं है। फिलहाल आईटी मिनिस्ट्री (MeitY) इस मामले की जांच करने की बात कह रही है।

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