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हवा में लटका है स्तंभ ऋषि अगस्त्य ने कराया था निर्माण भगवान शिव और विष्णु जी को है समर्पित, जानिए इस अनोखे मंदिर की कहानी

हमारे देश में कई ऐसे  एतिहासिक मंदिर  हैं जिनका इतिहास जानने के बाद लोग सोचने पर मजबूर हो जाते हैं ।  एक मंदिर है जिसका इतिहास पूरे दुनिया में मशहूर है। जी हाँ हम बाद कर रहे हैं आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में स्थित लेपाक्षी मंदिर। यह मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला के लिए जाना जाता है। ये मंदिर "हवा में लटका हुआ खंभा" के  वजह से  काफी फेमस है । मतलब कि इस मंदिर में एक ऐसा खंभा है जो जमीन से नही जुड़ा है वो हवा में लटका हुआ  है। आज हम आपको अपने इस आर्टिकल में बताएँगे की मदिर का खंभा जमीन से बिना जुड़े कैसे  खड़ा है।

By Aakansha Upadhyay 
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हमारे देश में कई ऐसे  एतिहासिक मंदिर  हैं जिनका इतिहास जानने  के बाद लोग सोचने पर मजबूर हो जाते हैं ।  एक मंदिर है जिसका इतिहास पूरे दुनिया में मशहूर है। जी हाँ हम बाद कर रहे हैं आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में स्थित लेपाक्षी मंदिर। यह मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला के लिए जाना जाता है। ये मंदिर “हवा में लटका हुआ खंभा” के  वजह से  काफी फेमस है । मतलब कि इस मंदिर में एक ऐसा खंभा है जो जमीन से नही जुड़ा है वो हवा में लटका हुआ  है। आज हम आपको अपने इस आर्टिकल में बताएँगे की मदिर का खंभा जमीन से बिना जुड़े कैसे  खड़ा है।

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 यह मंदिर 16वीं शताब्दी में विजयनगर साम्राज्य के शासनकाल के दौरान बनाया गया था। यह मंदिर भगवान शिव के उग्र अवतार, वीरभद्र को समर्पित है। मंदिर के निर्माण का श्रेय विरुपन्ना और विरन्ना नामक दो भाइयों को जाता है, जो राजा अच्युत राय के शासनकाल में विजयनगर साम्राज्य के अधीन राज्यपाल थे। जो वहां के राजा के यहां काम करते थे। एक मान्यता यह भी है कि इस मंदिर का निर्माण ऋषि अगस्त्य ने करवाया था।मंदिर के मुख्य हॉल में 70 खंभे हैं। जिनमें से एक खंभा जमीन से नही जुड़ा है ।  ये खंभा थोड़ा ऊपर उठा हुआ है।  इतना जगह बचा है कि इसके नीचे एक कपड़ा आसानी से पास हो सकता है ।  मान्यताओं के अनुसार, इस खंभे को छूने से व्यक्ति को सौभाग्य मिलता है। इस खंभे का रहस्य जानने की काफी कोशिश की गई, लेकिन आजतक इसके रहस्य को पता लगाने में सफल नही हुआ।

 

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यहाँ तक की इस रहस्य को  पता लगाने की काफी कोशिश ब्रिटिशर्स ने भी की। एक ब्रिटिश आर्किटेक्चर ने एक थियोरी दी कि इस मंदिर का सारा वजन बाकी 69 खंभों पर है। इसलिए एक खंभा हवा में लटकने से कोई फर्क नहीं पड़ता है।लेकिन जब इस थियोरी को टेस्ट किया गया, तो सामने कुछ और ही बात आई। जांच करने पर पता चला कि इस मंदिर का सारा भार इसी खंभे पर है। लेकिन फिर भी यह स्तंभ धरती से जुड़ा नहीं है। इसके बाद ब्रिटिशर्स ने भी इस मंदिर के रहस्य के सामने घुटने टेक दिए थे । इसके रहस्य को  देखकर हर कोई हैरान रह जाता है। इस मंदिर परिसर में एक विशाल नंदी, जो भगवान शिव का वाहन है, की मूर्ति भी है।

 

 

 

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