इन दृश्यों और संत-महात्माओं का अपमान देखकर जिसका मन विचलित न हो और जो भाजपा और उनके संगी साथियों के इस कुकृत्य से आहत और आक्रोशित न हो, वो अपने को भारतीय न कहे। ये शोध का विषय है कि भाजपाई और उनके भूमिगत संगी-साथी वास्तव में कौन लोग हैं, जो भारतमाता की हर धरोहर और विरासत को मिटाना चाहते हैं।
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर पर लिखा, ये भाजपाई अहंकार का भूकंप है जो मंदिरों को ध्वस्त कर रहा है और पूज्य वृक्षों की जड़ें उखाड़ रहा है। कोई इतना अत्याचारी और निर्दयी कैसे हो सकता है। अब वो समय आ गया है कि हर देशप्रेमी को मिलकर हर भाजपाई के घर, दुकान, दफ़्तर जाकर दरवाज़ा खटखटाकर पूछना होगा कि क्या वो भी भाजपाई नेतृत्व के इस विनाशकारी एजेंडे के साथ है अगर वो ‘हां’ कहता है तो उसका धार्मिक-सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए। हर भाजपाई समर्थक, कार्यकर्ता, पार्षद, विधायक, सासंद, मंत्री से ये सवाल किया जाए कि वो ‘देश’ के साथ है या भाजपा के।
उन्होंने आगे लिखा, इन दृश्यों और संत-महात्माओं का अपमान देखकर जिसका मन विचलित न हो और जो भाजपा और उनके संगी साथियों के इस कुकृत्य से आहत और आक्रोशित न हो, वो अपने को भारतीय न कहे। ये शोध का विषय है कि भाजपाई और उनके भूमिगत संगी-साथी वास्तव में कौन लोग हैं, जो भारतमाता की हर धरोहर और विरासत को मिटाना चाहते हैं।
ये भाजपाई अहंकार का भूकंप है जो मंदिरों को ध्वस्त कर रहा है और पूज्य वृक्षों की जड़ें उखाड़ रहा है। कोई इतना अत्याचारी और निर्दयी कैसे हो सकता है।
अब वो समय आ गया है कि हर देशप्रेमी को मिलकर हर भाजपाई के घर, दुकान, दफ़्तर जाकर दरवाज़ा खटखटाकर पूछना होगा कि क्या वो भी भाजपाई… pic.twitter.com/BvpBRCg765
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) January 25, 2026
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याद रहे ये वो ही लोग हैं जो आज़ादी के आंदोलन में साम्राज्यवादियों का साथ दे रहे थे। देश की सदियों पुरानी धार्मिक पहचान मिटानेवाले ये ‘विनाशवादी’ और समाज के सौहार्द को बिगाड़नेवाले ये ‘दरारवादी’ कौन लोग हैं। इनका मुखौटा उतारकर, इनका सच सबके सामने लाना होगा। भाजपा के समर्थक अकेले में बैठकर आत्म-मंथन करें और प्रायश्चित भी, नहीं तो भाजपाइयों के इस महापाप के भागीदारी बनकर वो और उनेक परिजन भी जन्म-जन्मांतर तक, इस पाप के दंड को ढोएंगे। जो भाजपा के साथ है; वो धर्म, संस्कृति, महात्माओं के मान-सम्मान व देश-समाज की एकता के ख़िलाफ़ है!