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ममता बनर्जी की TMC में बड़ी टूट, विधानसभा स्पीकर ने बागी ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष की दी मान्यता

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सियासी संकट गहरा गया है। टीएमसी सु्प्रीमो व पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (TMC Supremo and Former Chief Minister Mamata Banerjee) को बुधवार को बड़ा झटका लगा है। विधानसभा स्पीकर रवीन्द्र नाथ बोस (Assembly Speaker Rabindra Nath Bose) ने ऋतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) को नेता प्रतिपक्ष के तौर पर मान्यता दे दी है।

By santosh singh 
Updated Date

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सियासी संकट गहरा गया है। टीएमसी सु्प्रीमो व पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (TMC Supremo and Former Chief Minister Mamata Banerjee) को बुधवार को बड़ा झटका लगा है। विधानसभा स्पीकर रवीन्द्र नाथ बोस (Assembly Speaker Rabindra Nath Bose) ने ऋतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) को नेता प्रतिपक्ष के तौर पर मान्यता दे दी है। बता दें कि इससे पहले ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय (Shobhandeb Chattopadhyay) को इस पद के लिए नामित किया था, लेकिन पार्टी के भीतर विरोध सामने आ गया। करीब 80 में से 60 विधायकों ने शोभनदेब को नेता प्रतिपक्ष मानने से इंकार कर दिया। इसके बाद ऋतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) के नेतृत्व में 58 विधायकों ने स्पीकर से मुलाकात कर खुद को असली गुट बताया और उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाने की मांग की।

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दीदी मुख्य सलाहकार बनकर मार्गदर्शन करें

TMC से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee)  ने कहा कि 18वीं पश्चिम बंगाल विधानसभा (18th West Bengal Legislative Assembly) में तृणमूल कांग्रेस (TMC)  का यह दो-तिहाई मज़बूत विधायी दल ‘मैं’ में विश्वास नहीं रखता, यह ‘हम’ में विश्वास रखता है। जो भी नियम बनाए गए हैं, हमने हर नियम का पालन किया है। इसीलिए हमें 18वीं पश्चिम बंगाल विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल के तौर पर स्वीकार किया गया है। हम चाहते हैं कि ममता बनर्जी हमारी मुख्य सलाहकार बनें और हमें ऐसी सलाह दें जिससे हमें विपक्ष के तौर पर अपनी स्थिति मज़बूत करने में मदद मिले। 80 सदस्य तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर चुने गए थे। उनमें से दो-तिहाई से ज़्यादा सदस्यों ने अपना दावा पेश किया है, और उस दावे को स्वीकार कर लिया गया है।

हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में हार के एक महीने बाद तृणमूल कांग्रेस में विभाजन की खबर अब आधिकारिक हो गई है। विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 80 विधायकों में से 58 विधायकों ने पार्टी से निष्कासित विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा के नेतृत्व में बगावत कर दी है।

बुधवार को विधानसभा में एक नया प्रस्ताव पेश किया गया, जिस पर इन 58 विधायकों के हस्ताक्षर थे। इसमें दावा किया गया कि वे ही तृणमूल कांग्रेस के असली प्रतिनिधि हैं। इस प्रस्ताव में हावड़ा जिले की उलुबेरिया (पूर्व) विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के विधायक ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष (एलओपी) नामित किया गया है। इसी प्रस्ताव में तृणमूल कांग्रेस के विधायकों को विपक्ष का उप नेता नामित किया गया है। इनमें उत्तरी कोलकाता की एंटाली विधानसभा सीट से संदीपान साहा, पश्चिम मेदिनीपुर जिले के केशपुर से शिउली साहा और दक्षिण 24 परगना जिले के कस्बा से जावेद अहमद खान शामिल हैं।

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जिन 58 विधायकों के हस्ताक्षर इस प्रस्ताव पर थे, वे सभी सुबह से एक-एक करके विधानसभा परिसर में पहुंचने लगे। इसके बाद बागी विधायकों की एक आपात बैठक हुई, जिसमें विधानसभा में विपक्ष के लिए आरक्षित पांच सीटों के लिए पांच नामों का अनुमोदन किया गया। इसके बाद ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 58 विधायक स्पीकर के कक्ष में गए और प्रस्ताव प्रस्तुत किया। स्पीकर ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।

पिछले महीने तृणमूल कांग्रेस (TMC)  के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर के कार्यालय को एक पत्र भेजा था। इसमें शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष (एलओपी), नैना बंदोपाध्याय और असीमा पात्रा को विपक्ष की दो उप नेता और फिरहाद हकीम को विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के विधायी दल का मुख्य सचेतक नामित किया गया था।

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