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केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने जनता को दिलाया भरोसा, कहा- संघर्ष के बीच में भी नहीं होगी देश में उर्वरक की कमी

केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने शुक्रवार को उपभोक्ताओं को भरोसा दिलाया कि देश में उर्वरक की पर्याप्त आपूर्ति है। भले ही पश्चिम एशिया में संघर्ष जारी है। लोकसभा में पश्चिम एशिया संकट के उर्वरक की उपलब्धता पर पड़ने वाले असर के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब में मंत्री ने कहा कि सरकार ने पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की है।

By Satish Singh 
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नई दिल्ली। केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने शुक्रवार को उपभोक्ताओं को भरोसा दिलाया कि देश में उर्वरक की पर्याप्त आपूर्ति है। भले ही पश्चिम एशिया में संघर्ष जारी है। लोकसभा में पश्चिम एशिया संकट के उर्वरक की उपलब्धता पर पड़ने वाले असर के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब में मंत्री ने कहा कि सरकार ने पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की है। इसलिए घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है। मंत्री ने कहा कि सरकार आयात के मामले में कच्चे माल के स्रोतों में विविधता लाने पर भी विचार कर रही है और उसने कई देशों के साथ लंबी अवधि के आयात समझौते किए हैं।

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सरकार एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) के आयात पर निर्भरता कम करने के प्रयास कर रही है। इससे पहले मंगलवार को पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर मंत्रियों के समूह की एक बैठक संसद में हुई थी, जिसमें आवश्यक वस्तुओं विशेष रूप से उर्वरकों पर इसके संभावित प्रभाव पर चर्चा की गई। सूत्रों के अनुसार, मंत्रियों ने उर्वरकों की मौजूदा उपलब्धता और आपूर्ति की समीक्षा की और यह निष्कर्ष निकाला कि आने वाले खरीफ मौसम के लिए कोई तत्काल कमी नहीं हैऔर किसानों की ज़रूरतें पूरी की जाएंगी। हालांकि, इस क्षेत्र में चल रहे संकट के कारण उर्वरक उत्पादन पर अनुमानित 0.6 से 0.9 मिलियन टन का असर पड़ने की संभावना है।

सूत्रों के मुताबिक भारत सरकार मोरक्को जैसे देशों और अन्य वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं से आयात करके इस कमी को पूरा करने की योजना बना रही है। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और स्वास्थ्य एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा सहित कई अन्य मंत्री शामिल हुए। इस बीच फर्टिलाइज़र एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के महानिदेशक सुरेश कुमार चौधरी ने कहा कि पश्चिम एशिया में शिपिंग में रुकावटें और बढ़ती इनपुट लागत वैश्विक उर्वरक उत्पादन और कीमतों पर दबाव डाल रही हैं। लेकिन भारत सरकार और उद्योग के बीच घनिष्ठ समन्वय और सशक्त समूहों द्वारा निगरानी के माध्यम से इस प्रभाव को नियंत्रित कर रहा है। चौधरी ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे घटनाक्रमों ने वैश्विक ऊर्जा और उर्वरक बाजारों में काफी अस्थिरता ला दी है। क्योंकि यह क्षेत्र प्राकृतिक गैस और फसलों के लिए ज़रूरी पोषक तत्वों दोनों की आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने आगे कहा कि शिपिंग मार्गों में रुकावटें, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते और वैश्विक LNG की उपलब्धता में कमी दुनिया भर में इनपुट लागत और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव डाल रही हैं। एक तरफ संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल और दूसरी तरफ ईरान के बीच चल रहा संघर्ष लगभग एक महीने से जारी है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होने वाली शिपिंग बाधित हो रही है और कच्चे तेल तथा उर्वरकों सहित अन्य वस्तुओं की वैश्विक आपूर्ति में कमी आ रही है।

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