मारने वाला है भगवान, बचाने वाला है भगवान। वेनेजुएला में आए भूकंप ने बीभस्त रूप प्रस्तुत किया है। हर तरफ चीख पुकार और जगह जगह पर मलबे के ढ़ेर कुदरत की क्रूर कहानी कह रहे है। राहत और बचाव का कार्य तेजी पर चल रहा है।
Venezuela earthquake : मारने वाला है भगवान, बचाने वाला है भगवान। वेनेजुएला में आए भूकंप ने बीभस्त रूप प्रस्तुत किया है। हर तरफ चीख पुकार और जगह जगह पर मलबे के ढ़ेर कुदरत की क्रूर कहानी कह रहे है। राहत और बचाव का कार्य तेजी पर चल रहा है।
इसी बीच भूकंप के करीब 96 घंटे बाद एक पिता और उनके बेटे को ढही हुई इमारत के मलबे से जिंदा बाहर निकाला गया।
विशेषज्ञों के मुताबिक, भूकंप के 72 घंटे बाद किसी व्यक्ति के जीवित मिलने की संभावना बेहद कम रह जाती है। ऐसे में चार दिन तक मलबे में फंसे रहने के बावजूद दोनों का सुरक्षित बच जाना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है।
बचाव अभियान के दौरान राहतकर्मियों (Relief workers) ने रविवार को मलबे के भीतर ( Amidst the debris ) फसे पिता और पुत्र को बाहर निकाला। दोनों मिट्टी से पूरी तरह सने हुए थे और उनके शरीर पर कपड़े भी नहीं थे। आशंका जताई जा रही है कि लंबे समय तक फंसे रहने के दौरान उन्होंने खुद को बचाए रखने की कोशिश में कपड़े उतार दिए होंगे।
बचाव दल ने दोनों को प्राथमिक उपचार ( First Aid ) देने के बाद कपड़े से बने अस्थायी स्ट्रेचर पर लिटाकर मलबे से भरी गलियों के बीच से एम्बुलेंस तक पहुंचाया। भूकंप की तबाही के बीच भावुक पल को देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी घटनास्थल पर जुट गए।
राहतकर्मियों (Relief workers) ने उन्हें बाहर निकालते ही धीरे-धीरे हाइड्रेट करना शुरू किया। साथ ही आवश्यक दवाएं और प्राथमिक चिकित्सा देकर अस्पताल भेजा गया। डॉक्टरों के अनुसार, ऐसे मामलों में मरीज को तेजी से नहीं, बल्कि नियंत्रित तरीके से उपचार देना जरूरी होता है।
राहत एजेंसियों के मुताबिक, सप्ताहांत के दौरान कम से कम 33 लोगों को जीवित बचाया गया है। इसके बावजूद हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। समय बीतने के साथ जीवित लोगों को खोज निकालना लगातार कठिन होता जा रहा है, लेकिन बचाव दल उम्मीद नहीं छोड़ रहा।