बुजुर्गों की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां उनके सुकून को प्रभावित करती है। वृद्धावस्था में कमजोर हड्डियां गंभीर फ्रैक्चर के पीछे की प्रमुख वजह बन सकती है।
ऑस्टियोपोरोसिस
आज लोग 70–80 साल की उम्र में भी खुद से चल-फिर रहे हैं और स्वतंत्र जीवन जी रहे हैं। ऐसे में गिरने या फिसलने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis), विटामिन-डी की कमी (Vitamin D deficiency), आर्थराइटिस (Arthritis) और डायबिटीज (Diabetes) जैसी बीमारियां भी हड्डियों को कमजोर कर देती हैं, जिससे फ्रैक्चर का जोखिम (Risk of fracture) और ज्यादा बढ़ जाता है।
सामान्य लक्षण
फ्रैक्चर के सामान्य लक्षणों में गंभीर दर्द, सूजन, चलने या खड़े होने में अक्षमता और दृश्य विकृति शामिल हैं। अगर समय रहते इनका उपचार नहीं किया गया, तो अधिक समय तक बिस्तर पर रहने, संक्रमण, मांसपेशियों (Muscles) की हानि और जीवन की गुणवत्ता में कमी जैसी जटिलताएं हो सकती हैं।
रोकथाम के उपाय
नियमित हड्डी घनत्व (Bone density) की जांच कराना
विटामिन डी के स्तर की निगरानी
कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर आहार लेना
घर में गिरने से बचने के लिए उचित रोशनी और सहायक उपकरण लगाना
नियमित दृष्टि जांच कराना
संतुलन और शक्ति बढ़ाने वाले व्यायाम करना
नियमित रूप से हड्डी स्वास्थ्य की जांच करानी चाहिए और चोट लगने के बाद तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।