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जब राखी की डोर ने बांधे अपनत्व के रिश्ते, ईश वेलफेयर फाउंडेशन ने मानसिक दिव्यांग महिलाओं व बच्चियों के साथ मनाया रक्षाबंधन

राखी सिर्फ कलाई पर बांधा जाने वाला धागा नहीं, यह उस रिश्ते का एहसास है जिसमें अपनापन, सम्मान और स्नेह होता है। इसी भावना के साथ ईश वेलफेयर फाउंडेशन की टीम ने इस वर्ष भी को रक्षाबंधन का पर्व उन मानसिक दिव्यांग महिलाओं एवं बच्चियों के साथ मनाया, जिनके जीवन में अपनों का साथ और त्योहारों की खुशियां अक्सर अधूरी रह जाती हैं।

By santosh singh 
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लखनऊ। राखी सिर्फ कलाई पर बांधा जाने वाला धागा नहीं, यह उस रिश्ते का एहसास है जिसमें अपनापन, सम्मान और स्नेह होता है। इसी भावना के साथ ईश वेलफेयर फाउंडेशन की टीम ने इस वर्ष भी को रक्षाबंधन का पर्व उन मानसिक दिव्यांग महिलाओं एवं बच्चियों के साथ मनाया, जिनके जीवन में अपनों का साथ और त्योहारों की खुशियां अक्सर अधूरी रह जाती हैं।

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पॉल मर्सी होम (दया सदन), वृंदावन कॉलोनी लखनऊ में आयोजित यह कार्यक्रम महज एक आयोजन नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं, स्नेह और अपनत्व का ऐसा खूबसूरत उत्सव बन गया, जिसने हर किसी के दिल को छू लिया। महिलाओं एवं बच्चियों ने जब अपने हाथों से राखी बांधी और बदले में उन्हें प्यार, सम्मान एवं अपनत्व मिला, तो उनके चेहरों पर खिली मुस्कान पूरे कार्यक्रम की सबसे खूबसूरत तस्वीर बन गई।

कार्यक्रम का शुभारंभ संरक्षक जितेंद्र सिंह व सरिता सिंह के तरफ से किया गया। इसके बाद कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए महिलाओं एवं बच्चियों के साथ विभिन्न मनोरंजक गतिविधियां एवं प्रतियोगिताएं कराईं। उनके उत्साह और खुशी को बढ़ाने के लिए चार महिलाओं को प्यारी राखी बहना व उनमें से एक महिला को “राखी स्टार” जैसे विशेष सम्मान दिए गए। इन सम्मान के दौरान महिलाओं एवं बच्चियों के चेहरे पर दिखाई देने वाली खुशी और उत्साह ने पूरे वातावरण को भावुक और खुशनुमा बना दिया।

कार्यक्रम में जीएस विरदी व पवन सिंह ने अपने मधुर गीत-संगीत से ऐसा समां बांधा कि पूरा वातावरण हंसी, खुशी और उल्लास से भर उठा। गीतों की धुन पर महिलाओं एवं बच्चियों ने खूब आनंद लिया और उनके चेहरों पर दिखाई दे रही खुशी ने उपस्थित सभी लोगों को भावुक कर दिया। इस अवसर पर महिलाओं एवं बच्चियों को बंद-मक्खन, हलुआ-चना, फल एवं मिठाई इत्यादि खिलाई गई। साथ ही संस्था की ओर से 50 किलो आटा, 60 किलो चावल, 30 किलो दाल, 18लीटर तेल,17 किलो चीनी, 18 किलो पोहा सहित अन्य राशन सामग्री भी भेंट की गई।

सेवा से बढ़कर कोई उत्सव नहीं…

रक्षाबंधन के इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने महसूस किया कि इन महिलाओं एवं बच्चियों के साथ बिताया गया समय ही इस पर्व की सबसे बड़ी खुशी है। राखी की उस छोटी सी डोर ने केवल कलाई नहीं बांधी, बल्कि दिलों को दिलों से जोड़ते हुए स्नेह, सम्मान और अपनत्व के रिश्ते को और मजबूत किया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में नूतन वर्मा, शिखा, वीना बेबोट, रागिनी तिवारी,जी.एस. विरदी, पवन सिंह,गिरीश कुमार सिंह, एस.पी. मिश्रा, बी.के. सिन्हा, कमल सेन , पेंशनर क्लब से जीतबहादुर पुरी, सुभाष चंद्र मिश्रा, एस.के. पाण्डे , अश्वनी , संजय वर्मा  व उनके पिता मुन्ना लाल वर्मा , राकेश मिश्रा,निशांत सिंह , हिमांशु , अमर सिंह , शिखा , मनोज सिंग, मानसी उपाध्याय, भारती ठाकुर सहित अनेक सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस अवसर पर संस्था के वरिष्ठ सदस्यगण,अनेक समाजसेवी एवं मीडिया बंधुओं की गरिमामय उपस्थिति रही।

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सबसे खूबसूरत रिश्ता-अपनत्व का

इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि रिश्ते केवल खून से नहीं, भावनाओं से भी बनते हैं। किसी के चेहरे पर सच्ची मुस्कान लाने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी थोड़ा सा समय, थोड़ा सा स्नेह और दिल से दिया गया अपनापन ही किसी के लिए पूरी दुनिया की खुशी बन जाता है। ईश वेलफेयर फाउंडेशन का संकल्प है कि त्योहारों की खुशियां अपने से पहले उन चेहरों तक पहुंचें, जिनके जीवन में खुशियों की कमी है। क्योंकि किसी के चेहरे पर मुस्कान लाना ही सेवा का सबसे सुंदर रूप और मानवता का सबसे सच्चा उत्सव है।

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