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बढ़ती उम्र में क्यों घटती है मांसपेशियों की ताकत? नई रिसर्च में सामने आया चौंकाने वाला कारण

उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। ऐसे में मांसपेशियों का कमजोर होना सबसे आम समस्याओं में से एक है। उम्र के साथ चलने, सीढ़ियां चढ़ने या कुर्सी से उठने जैसे सामान्य काम भी मुश्किल होने लगते हैं। इस स्थिति को सार्कोपीनिया (Sarcopenia) कहा जाता है। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इसके पीछे एक अहम जैविक प्रक्रिया का पता लगाया है, जो भविष्य में इसके इलाज की नई राह दिखा सकती है।

By Sushil Sah 
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नई दिल्ली। उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। ऐसे में मांसपेशियों का कमजोर होना सबसे आम समस्याओं में से एक है। उम्र के साथ चलने, सीढ़ियां चढ़ने या कुर्सी से उठने जैसे सामान्य काम भी मुश्किल होने लगते हैं। इस स्थिति को सार्कोपीनिया (Sarcopenia) कहा जाता है। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इसके पीछे एक अहम जैविक प्रक्रिया का पता लगाया है, जो भविष्य में इसके इलाज की नई राह दिखा सकती है।

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वैज्ञानिकों ने इस नई रिसर्च में मांसपेशियों की कोशिकाओं के अंदर मौजूद माइटोकॉन्ड्रिया पर ध्यान केंद्रित किया है। माइटोकॉन्ड्रिया कोशिकाओं का ‘पावरहाउस’ होता है, क्योंकि यह शरीर के लिए ऊर्जा तैयार करता है। इसकी कार्यक्षमता उम्र बढ़ने के साथ प्रभावित होने लगती है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस शोध में कार्डियोलिपिन (Cardiolipin) नाम के एक खास फैट-मॉलिक्यूल की भूमिका सामने आई है। यह माइटोकॉन्ड्रिया की आंतरिक झिल्ली को स्थिर रखने और ऊर्जा उत्पादन में सहायता करता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि उम्र बढ़ने पर मांसपेशियों में कार्डियोलिपिन का स्तर कम हो सकता है, जिससे माइटोकॉन्ड्रिया में तनाव बढ़ता है।

इस बदलाव के कारण मांसपेशियों में तेज गति और ज्यादा ताकत देने वाले fast-twitch fibers की तुलना में धीमे लेकिन अधिक सहनशील slow-twitch fibers बढ़ सकते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह शरीर की एक तरह की सुरक्षात्मक प्रतिक्रिया हो सकती है, जिससे कोशिकाएं माइटोकॉन्ड्रियल नुकसान से बचने की कोशिश करती हैं।

प्रयोगशाला में चूहों पर किए गए परीक्षणों में कार्डियोलिपिन से जुड़े बदलावों को प्रभावित करने पर मांसपेशियों की उम्र संबंधी कुछ प्रक्रियाओं में सुधार देखा गया। हालांकि, ये परिणाम अभी पशु-अध्ययन तक सीमित हैं और इंसानों में इसकी पुष्टि के लिए आगे क्लिनिकल रिसर्च जरूरी है।

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वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि माइटोकॉन्ड्रिया और कार्डियोलिपिन की भूमिका को समझने से भविष्य में सार्कोपीनिया और उम्र से जुड़ी मांसपेशियों की कमजोरी के लिए नए उपचार विकसित किए जा सकते हैं।

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