ब्रजेश पाठक ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि, सपा मीडिया सेल के साथी आलोचना करने के दौरान जिन शब्दों का प्रयोग करते हैं, उसे पढ़ कर लगता ही नहीं कि यह पार्टी राममनोहर लोहिया और जनेश्वर मिश्र की पार्टी रह गई है। जार्ज साहब की बात तथाकथित "समाजवादी " भूल गए कि शिविर लगाया करो, पढ़ा-लिखा करो।
लखनऊ। समाजवादी पार्टी की तरफ से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के डीएनए को लेकर विवादित पोस्ट की गई। इसको लेकर प्रदेश का सियासी पारा बढ़ गया है। भाजपा नेताओं की तरफ से लगातार सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव पर निशाना साधा जा रहा है। अब डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव से कहा कि, सपाइयों को लोहिया- जेपी पढ़ाइए और पंडित जनेश्वर जी के भाषण सुनवाइए ताकि इनके आचरण और उच्चारण में समाजवाद झलके।
ब्रजेश पाठक ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि, सपा मीडिया सेल के साथी आलोचना करने के दौरान जिन शब्दों का प्रयोग करते हैं, उसे पढ़ कर लगता ही नहीं कि यह पार्टी राममनोहर लोहिया और जनेश्वर मिश्र की पार्टी रह गई है। जार्ज साहब की बात तथाकथित “समाजवादी ” भूल गए कि शिविर लगाया करो, पढ़ा-लिखा करो।
अखिलेश जी! सपाइयों को लोहिया-जेपी पढ़ाइए और पंडित जनेश्वर जी के भाषण सुनवाइए, ताकि इनके आचरण और उच्चारण में समाजवाद झलके। लोहिया की किताबें आप पर न हो तो मैं उपलब्ध करवा सकता हूं…हे महान लोहिया, जनेश्वरजी! इन नादानों को क्षमा करें, इन्हें कुछ पढ़ाया-लिखाया, सिखाया व समझाया नहीं गया।
सपा मीडिया सेल के साथी आलोचना करने के दौरान जिन शब्दों का प्रयोग करते हैं, उसे पढ़ कर लगता ही नहीं कि यह पार्टी राममनोहर लोहिया और जनेश्वर मिश्र की पार्टी रह गई है। जार्ज साहब की बात तथाकथित "समाजवादी " भूल गए कि शिविर लगाया करो, पढ़ा – लिखा करो ।
अखिलेशजी ! सपाइयों को…
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— Brajesh Pathak (@brajeshpathakup) May 18, 2025
ये नहीं जानते हैं कि समाजवाद क्या है? इन्होंने समाजवाद को गाली गलौज, उदंडई और स्तरहीन टिप्पणियों की प्रयोगशाला बना दिया है। जब विपक्ष में रहते हुए इनका ये रूप है तो सत्ता में होते हुए इन्होंने क्या किया होगा, सहज अंदाज़ा लगाया जा सकता है। हैरानी ये भी कि उदंडता, अश्लीलता और अराजकता की संस्कृति के ये शिशुपाल अपने बचाव में योगेश्वर कृष्ण का नाम लेने का दुस्साहस भी कर लेते हैं। हे योगेश्वर कृष्ण, इन शिशुपालों का ऐसे ही उपचार करते रहना जैसे यूपी की जनता पिछले दस सालों से करती आ रही है। यही इनकी नियति होगी।