यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज के शोधकर्ताओं ने बायोटेक कंपनी DIOSynVax के साथ मिलकर इस नई तकनीक पर काम किया है। उन्होंने कहा हैं कि यह वैक्सीन मौजूदा वायरसों के साथ-साथ भविष्य में आनेवाने नए वेरिएंट्स और खतरनाक वायरसों से भी बचाने में मदद कर सकती है। यह पहले मानव परीक्षण का अहम स्टेज भी पार कर लिया है और शुरुआती क्लीनिकल ट्रायल में यह वैक्सीन सुरक्षित पाई गई है। अब इसे 200 से अधिक लोगों पर बड़े स्तर पर जांचा जाएगा।
AI Vaccine: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका स्वास्थ्य क्षेत्र में भी तेजी से बढ़ रही है। AI अब बीमारियों की पहचान और नई दवाओं के विकास के साथ—साथ वैक्सीन निर्माण की ओर कदम बढ़ाया है। वैज्ञानिकों ने AI की मदद से पहली ऐसी वैक्सीन विकसित करने का दावा किया है दावा किया है जो किसी एक वायरस नहीं बल्कि पूरे वायरस परिवार के खिलाफ सुरक्षा प्रदान कराएगी। यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज के शोधकर्ताओं ने बायोटेक कंपनी DIOSynVax के साथ मिलकर इस नई तकनीक पर काम किया है। उन्होंने कहा हैं कि यह वैक्सीन मौजूदा वायरसों के साथ-साथ भविष्य में आनेवाने नए वेरिएंट्स और खतरनाक वायरसों से भी बचाने में मदद कर सकती है। यह पहले मानव परीक्षण का अहम स्टेज भी पार कर लिया है और शुरुआती क्लीनिकल ट्रायल में यह वैक्सीन सुरक्षित पाई गई है। अब इसे 200 से अधिक लोगों पर बड़े स्तर पर जांचा जाएगा।
वैक्सीन विकास में एक नया दौर
अब तक ज्यादातर वैक्सीन किसी खास वायरस को ध्यान में रखकर बनाई जाती रही है। इस रणनीति ने करोड़ों लोगों की जान बचाई है। लेकिन वायरस अपना स्वरूप लगातार बदलते रहते हैं। इसी कारण के चलते फ्लू और कोविड-19 जैसी बीमारियों के लिए समय-समय पर वैक्सीन को अपडेट करना पड़ता है। शोधकर्ताओं का कहना हैं कि वैज्ञानिक हमेशा वायरस के पीछे भागते रहते हैं। जब तक नये वायरस की पहचान होती है, उसके खिलाफ वैक्सीन बनाई जाती है और लोगों तक पहुंचती है, तब तक संक्रमण बहुत ज्यादा फैल चुका होता है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज के प्रोफेसर जोनाथन हीनी के अनुसार, कोविड-19 महामारी ने ये साबित किया कि हम वैक्सीन तेजी से बना सकते हैं लेकिन सोच अभी भी पुरानी है। हांलाकि उनका लक्ष्य ऐसी एक वैक्सीन बनाना है जो पूरे वायरस परिवार को निशाना बना सके।
AI ने कैसे तैयार की यह वैक्सीन?
वैज्ञानिकों ने इस परियोजना के लिए दुनिया भर से एकत्रित कोरोनावायरस के जीनोमिक डेटा का विश्लेषण किया। इनमें भविष्य में इंसानों को संक्रमित करने वाले पुराने प्रकोपों, वर्तमान संक्रमणों और पशु वायरसों की जानकारी शामिल थी। AI और मशीन लर्निंग सिस्टम ने इन आनुवंशिक आंकड़ों का अध्ययन कर यह पता लगाया कि वायरस के कौन से हिस्से लंबे समय तक लगभग अपरिवर्तित रहते हैं। इसके आधार पर शोधकर्ताओं ने एक विशेष सुपर-एंटीजन तैयार किया है। आपको बता दें कि एंटीजन वह घटक होता है जो शरीर की प्रतिरक्षा सिस्टम को दुश्मन की पहचान कराने में मदद करता है। इसके अलावा जहां सामान्य वैक्सीन किसी एक वायरस के एंटीजन पर आधारित होती है वहीं यह नया एंटीजन कई संबंधित कोरोनावायरसों की साझा विशेषताओं को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
क्या है यूनिवर्सल सार्बेको वैक्सीन?
जिस वैक्सीन का उपयोग मानव परीक्षण में किया गया उसे यूनिवर्सल सार्बेको कोरोनावायरस वैक्सीन कहा जाता है। सार्बेकोवायरस, कोरोनावायरस का एक समूह है जिसमें कोविड-19 के लिए जिम्मेदार SARS-CoV-2, 2003 की SARS महामारी का वायरस और चमगादड़ों में पाए जाने वाले कई अन्य कोरोनावायरस शामिल हैं।
पहले मानव परीक्षण में क्या नतीजे मिले?
इस परीक्षण में 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग के स्वस्थ स्वयंसेवकों को शामिल किया गया.
इस वैक्सीन को एक विशेष माइक्रोफ्लूडिक जेट सिस्टम के जरिए दिया गया जो डीएनए आधारित फॉर्मूलेशन था। क्योंकि इस तकनीक में पारंपरिक सुई का उपयोग के बजाय उच्च दबाव वाली तरल धारा त्वचा के भीतर जाकर वैक्सीन पहुंचाती है। परीक्षण के दौरान वैक्सीन सुरक्षित पाई गई। हालांकि वैज्ञानिकों ने माना कि प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया अभी शुरुआती स्तर पर रही लेकिन फेज-1 परीक्षण का उद्देश्य सुरक्षा और प्रारंभिक प्रभावों का मूल्यांकन करना होता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, किसी वायरस परिवार के साझा गुणों को पहले से पहचानने के बाद उसके खिलाफ वैक्सीन महामारी फैलने से पहले तैयार की जा सकती है। साथ ही AI की मदद से इन आंकड़ों का विश्लेषण कर वैज्ञानिक संभावित खतरों का अनुमान लगा सकते हैं और पहले से सुरक्षा उपाय विकसित कर सकते हैं।
क्या बर्ड फ्लू और इबोला के खिलाफ भी काम करेगी यह तकनीक?
शोधकर्ता अब इसे अन्य खतरनाक वायरसों पर भी लागू कर रहे हैं। इनमें सबसे मुख्य बर्ड फ्लू (H5N1) है जिसने दुनिया के कई हिस्सों में पक्षियों, स्तनधारियों और इंसानों को प्रभावित किया है। AI आधारित यह तकनीक ऐसे विभिन्न वेरिएंट्स के खिलाफ एक व्यापक सुरक्षा कवच तैयार करने में मदद कर सकती है। इसके अलावा इबोला वायरस प के खिलाफ भी इस प्लेटफॉर्म का परीक्षण किया जा रहा है। हांलाकि वर्तमान में यह वैक्सीन सभी प्रकार के इबोला वायरसों पर प्रभावी नहीं हैं। AI आधारित यह नई सोच इंसानों को स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में वायरस के पीछे नहीं बल्कि उनसे एक कदम आगे चलने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।