यूपी की राजधानी लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शनिवार को महिला पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव के तरफ से सवाल पूछे जाने और उसके बाद हुए घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है।
लखनऊ। यूपी की राजधानी लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शनिवार को महिला पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव के तरफ से सवाल पूछे जाने और उसके बाद हुए घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है।
इसी वीडियो को एक्स पर शेयर करते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बगैर किसी का नाम लेते हुए लिखा कि नाम बदलने वाले अब ‘प्रेस वार्ता’ का नाम बदलकर ‘प्रेस एकालाप’ कर दें क्योंकि जब सिर्फ़ बयान दिया जाना है और प्रेस को सवाल पूछने का अधिकार ही नहीं है तो बिना वार्तालाप ‘वार्ता’ शब्द का क्या अर्थ रह जाता है? माननीय सबका समय क्यों ख़राब कर रहे हैं, प्रेस रिलीज़ भेजकर ही काम चलाएं और दोनों का समय बचाएं।
नाम बदलनेवाले अब ‘प्रेस वार्ता’ का नाम बदलकर ‘प्रेस एकालाप’ कर दें क्योंकि जब सिर्फ़ बयान दिया जाना है और प्रेस को सवाल पूछने का अधिकार ही नहीं है तो बिना वार्तालाप ‘वार्ता’ शब्द का क्या अर्थ रह जाता है? माननीय सबका समय क्यों ख़राब कर रहे हैं, प्रेस रिलीज़ भेजकर ही काम चलाएं और… pic.twitter.com/0iiXl9rDwk
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) September 12, 2026
उन्होंने कहा कि सत्य ये है कि उप्र में सवालों की भरमार है लेकिन इनके पास जवाब ही नहीं हैं। मुंह मोड़ कर जाना, मैदान छोड़कर भागना भी कहलाता है। ये शासन में पक्षपात करते हैं और प्रेस वार्ता में एकतरफ़ा बयानबाज़ी। अब क्या ये भी कहेंगे कि ‘प्रश्न सुनने के मूड में नहीं है।’
वायरल वीडियो में शनिवार को भाजपा कार्यालय में महिला पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सवाल का जवाब मांगती दिखती हैं। वह कहती हैं कि प्रेस वार्ता है तो सवाल पूछना बनता है? महिला पत्रकार कहती है कि बैठक केवल अपनी बात रखने के लिए नहीं बुलाई गई थी। महिला पत्रकार से वीडियो बंद करने को कहा जाता है, वे मना करती हैं। अंत में कहती हैं, अगर जवाब नहीं देना है तो इसे प्रेस वार्ता नहीं, प्रेस संबोधन लिखिए।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। सपा नेता आईपी सिंह ने दावा किया कि सवाल पूछने के बाद स्थानीय पुलिस और एलआईयू (LIU) द्वारा महिला पत्रकार से पूछताछ की आलोचना की है। हालांकि, यह घटना पूरी तरह से एक तीखी राजनीतिक और पत्रकारीय बहस का हिस्सा बन चुकी है।