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बुर्ज खलीफा की खिड़कियों को आसमान में लटककर करते हैं साफ, जान जोखिम में डालकर ऐसे करते हैं नौकरी

दुबई की पहचान बन चुका बुर्ज खलीफा दुनिया की सबसे ऊंची इमारत है। 828 मीटर ऊंची इस इमारत को दूर से देखकर शायद ही कोई अंदाजा लगा पाए कि इसकी चमक बरकरार रखने के लिए कर्मचारियों को कितने जोखिम भरे हालात में काम करना पड़ता है। यहां खिड़कियों और बाहरी हिस्से की सफाई जमीन से नहीं, बल्कि कई सौ मीटर की ऊंचाई पर की जाती है।

By Kalpna Pandey 
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Burj Khalifa Cleaning: बुर्ज खलीफा में करीब 24,348 खिड़कियां हैं और इनके ग्लास का कुल क्षेत्रफल लगभग 1.2 लाख वर्ग मीटर बताया जाता है। इतनी बड़ी सतह की सफाई अपने आप में चुनौती है। इसके लिए अलग-अलग हिस्सों में विशेष मशीनों और प्रशिक्षित कर्मचारियों की मदद ली जाती है। इमारत के कुछ हिस्सों में करीब 1,500 किलो वजन वाली बकेट मशीनें ट्रैक पर चलती हैं। इनसे जुड़ी गोंडोलास में कर्मचारी बैठकर शीशों की सफाई करते हैं। ऊंचाई बढ़ने पर सफाई का तरीका भी बदल जाता है।

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109वीं मंजिल के ऊपर क्रैडल्स का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि इमारत के सबसे ऊंचे हिस्सों और स्पायर तक पहुंचने के लिए विशेषज्ञ कर्मचारी रस्सियों के सहारे नीचे उतरते हैं। ऐसे हिस्सों में सामान्य मशीनों से सफाई करना संभव नहीं होता।

 

 

तेज हवा और गर्मी सबसे बड़ी चुनौती

इतनी ऊंचाई पर काम करने वालों के लिए सबसे बड़ा खतरा सिर्फ नीचे गिरने का नहीं है। तेज हवा भी काम को बेहद मुश्किल बना सकती है। सफाई शुरू करने से पहले मौसम और हवा की स्थिति देखी जाती है और तेज हवा होने पर काम रोक दिया जाता है।

दुबई की गर्मी भी कर्मचारियों के लिए बड़ी चुनौती है। काम के दौरान उन्हें विशेष कपड़े पहनने पड़ते हैं और शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पानी व इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक का इस्तेमाल किया जाता है। काम को इस तरह प्लान किया जाता है कि तेज धूप का असर कम से कम हो।

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पूरी सफाई में लग सकते हैं कई महीने

बुर्ज खलीफा की बाहरी सफाई किसी एक दिन का काम नहीं है। पुरानी रिपोर्टों के मुताबिक, इस काम के लिए करीब 36 कर्मचारियों की टीम लगती रही है और पूरी प्रक्रिया में 3 से 4 महीने तक का समय लग सकता है। इन कर्मचारियों को ऊंचाई पर काम करने, रस्सियों के सहारे उतरने, सुरक्षा उपकरणों के इस्तेमाल और आपात स्थिति से निपटने की खास ट्रेनिंग दी जाती है।

यानी बुर्ज खलीफा की चमक के पीछे सिर्फ आधुनिक मशीनें ही नहीं, बल्कि उन कर्मचारियों की मेहनत भी है जो सैकड़ों मीटर की ऊंचाई पर जान जोखिम में डालकर इस इमारत को साफ-सुथरा रखते हैं।

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