राहुल गांधी ने आगे कहा, नरेंद्र मोदी ने हिंदुस्तान के एग्रीकल्चर सेक्टर का दरवाजा अमेरिका के लिए खोल दिया है। इस फैसले के बाद अमेरिका का सामान, भारत आएगा और हमारे किसान तबाह हो जाएंगे। नरेंद्र मोदी यह काम नहीं करना चाहते थे। चार महीने तक डील रुकी हुई थी, क्योंकि हिंदुस्तान का कोई भी प्रधानमंत्री किसी दूसरे देश के लिए एग्रीकल्चर सेक्टर को नहीं खोल सकता। मगर सवाल है- नरेंद्र मोदी ने जो काम चार महीने तक नहीं किया, उसे उन्होंने 15 मिनट में क्यों कर दिया?
नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने पंजाब के बरनाला में किसान महाचौपाल को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि, पंजाब जानता है कि देश की नींव किसान और मजदूर होता है। किसान और मजदूर के बिना देश मजबूत नहीं हो सकता है। हिंदुस्तान की फूड सिक्योरिटी में किसानों और मजदूरों की सबसे बड़ी मेहनत रही है। ‘हरित क्रांति’ भी पंजाब के किसानों और मजदूरों की मेहनत थी।
उन्होंने कहा कि, देश में ‘तूफान’ आने वाला है क्योंकि अमेरिका का अखरोट, बादाम, सेब, दाल, कपास, सोयाबिन भारत आएगा। नरेंद्र मोदी ने देश का सारा का सारा डेटा ट्रंप को सौंप दिया। नरेंद्र मोदी ने ट्रंप को गारंटी दी है कि हिंदुस्तान हर साल 9 लाख करोड़ रुपए के अमेरिकन प्रोडक्ट खरीदेगा साथ ही कहा कि, मैंने संसद में अपने भाषण के दौरान पूर्व आर्मी चीफ जनरल नरवणे जी की किताब पर सवाल पूछे, क्योंकि नरवणे जी ने किताब में बताया है कि चीन के टैंक भारतीय सीमा की तरफ आ रहे थे, लेकिन जब उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से फोन पर बातकर अपने लिए ऑर्डर मांगे तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
फिर नरवणे जी ने NSA अजित डोवाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर को भी फोन किया, लेकिन जवाब नहीं मिला। दो घंटे बीतने के बाद नरवणे जी ने राजनाथ सिंह को फोन कर फिर से अपने लिए आदेश मांगे और कहा-आप PM मोदी से बात कीजिए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने PM मोदी से बात की। नरेंद्र मोदी ने नरवणे जी से बिना बात किए राजनाथ सिंह से कहा: नरवणे जी से कह दो- ‘जो उचित समझो, वो करो’। नरवणे जी ने अपनी किताब में आगे लिखा कि मुझे उस दिन लगा कि मैं अकेला खड़ा हूं, क्योंकि मुझे प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री ने कोई आदेश नहीं दिए। मैं यही बात संसद में कहना चाहता था, लेकिन मोदी सरकार ये सब मुझे बोलने नहीं दिया, क्योंकि सरकार डरी हुई थी।
राहुल गांधी ने आगे कहा, नरेंद्र मोदी ने हिंदुस्तान के एग्रीकल्चर सेक्टर का दरवाजा अमेरिका के लिए खोल दिया है। इस फैसले के बाद अमेरिका का सामान, भारत आएगा और हमारे किसान तबाह हो जाएंगे। नरेंद्र मोदी यह काम नहीं करना चाहते थे। चार महीने तक डील रुकी हुई थी, क्योंकि हिंदुस्तान का कोई भी प्रधानमंत्री किसी दूसरे देश के लिए एग्रीकल्चर सेक्टर को नहीं खोल सकता। मगर सवाल है- नरेंद्र मोदी ने जो काम चार महीने तक नहीं किया, उसे उन्होंने 15 मिनट में क्यों कर दिया?
कांग्रेस सांसद ने आगे कहा, अमेरिका को चीन से लड़ना है तो उसे हिन्दुस्तान के डाटा की जरुरत है। बिना हिन्दुस्तान के डाटा के अमेरिका चीन से नहीं लड़ सकता। क्योंकि चीन के पास दुनिया का सबसे बड़ा डाटा है और फिर भारत के पास है। दुनिया AI की बात करती है लेकिन बिना डाटा के AI का कोई मतलब नहीं है और डाटा भारत के पास है। पिछली सदी तेल की थी, सउदी अरब, अमेरिका, रूस, ईरान के पास तेल था लेकिन 21वीं सदी डाटा की है। लेकिन US-भारत की ट्रेड डील में नरेंद्र मोदी ने पूरा डाटा अमेरिका के हवाले कर दिया है। अब हिन्दुस्तान का डाटा अमेरिका कहीं भी रख सकता है।
नरेंद्र मोदी ने अमेरिका से कहा है कि आप जिससे तेल खरीदने को कहेंगे, उससे ही हम तेल खरीदेंगे। हिंदुस्तान का कोई भी प्रधानमंत्री ऐसा काम नहीं करता। मैं आपको लिखकर दे सकता हूं कि नरेंद्र मोदी भी यह काम नहीं करते। इसलिए मेरा सवाल है: आखिर उस दिन ऐसा क्या हुआ कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश का सारा डेटा अमेरिका को सौंप दिया। हमारे देश और किसानों का डेथ वारंट साइन कर दिया।
कांग्रेस सांसद ने आगे कहा, पूरी दुनिया के सामने ट्रंप कह रहा है, हिंदुस्तान के जहाज गिर गए।मैंने भारत-पाकिस्तान का युद्ध रुकवा दिया। जब चाहूं, नरेंद्र मोदी का करियर खत्म कर दूं। लेकिन नरेंद्र मोदी एक भी शब्द नहीं बोल पा रहे हैं, क्योंकि उसने प्रधानमंत्री का गला पकड़ लिया है। इसलिए मोदी ने ट्रेड डील भी साइन की है। नरेंद्र मोदी को रात में नींद नहीं आ रही है। क्योंकि Epstein files और अडानी का केस एक दिन जरूर खुलेगा। मैं आपको बता देता हूं- नरेंद्र मोदी इन मामलों से बच नहीं सकते।
साथ ही कहा, पंजाब के किसानों को याद रखना है कि नरेंद्र मोदी ने पहले काले कृषि कानून लाकर आपको बेचने की कोशिश थी। अब यहां के मजदूरों के हाथ से मनरेगा और उनके काम के अधिकार को छीन लिया है। मैं सिर्फ यही कहना चाहता हूं- हम देश के किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों के साथ मजबूती से खड़े हैं। हम पीछे हटने वाले नहीं हैं।