क्या इस चैत्र नवरात्रि में आप अपने घर में माता के नाम पर अखंड ज्योत जला रहे है तो यहां ध्यान दीजिए..क्योंकि कुछ नियम ऐसे होते है जिनका पालन करना ज्योत जलाने के समय जरूरी होता है। ज्योतिषियों का कहना है कि नियम के विरूद्ध यदि ज्योत जलाई जाती है तो माता रानी नाराज भी हो सकती है।
चैत्र नवरात्रि मां दुर्गा की उपासना का एक पवित्र समय है, इस दौरान भक्तगण श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाते हैं। नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने की विशेष धार्मिक परंपरा निभाई जाती है।
क्या है नियम
नवरात्रि में अखंड ज्योति को प्रतिपदा तिथि से लेकर दशमी तिथि तक लगातर जलाया जाता है। नवरात्र के 9 दिनों तक अखंड ज्योत जलती रहनी चाहिए। ऐसा करने से देवी दुर्गा की कृपा बनी रहेगी। दीपक में शुद्ध घी का प्रयोग करें। इसे आप चावल, जौ या गेहूं के ऊपर रखें। सामग्री शुद्ध और सात्विक होनी चाहिए। टूटे हुए चावल का प्रयोग न करें, क्योंकि यह अशुद्ध होते हैं। जब आप अखंड ज्योत जला रहे हैं, तो इस मंत्र का जाप करें- “करोति कल्याणं, आरोग्यं धन संपदाम्, शत्रु बुद्धि विनाशाय, दीपं ज्योति नमोस्तुते”। इस मंत्र के जाप करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहेगी, इसके साथ ही शत्रुओं दूर होते हैं और स्वास्थ्य बेहतरीन होता है। इस बात का ध्यान रखें कि, जहां पर अखंड ज्योति जल रही है, वहां पूरे स्थान की साफ-सफाई का रखें। जगह को स्वच्छ रखें और कोई नकारात्मक ऊर्जा न आए, इसके लिए घर के वातावरण को शांत बनाए रखना जरुरी है।
सावधानियां
कभी भी अखंड ज्योति को अकेला न छोड़ें। ज्योत को जलता हुआ बनाएं रखें। किसी कारणवश यह बुझ जाए, तो इसे तुरंत पुन: जलाकर सही स्थिति में रखें। ज्योत का बुझना अशुभ होता है। अखंड ज्योति की लौ सदैव पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ होनी चाहिए। अखंड ज्योत को जमीन पर नहीं रखनी चाहिए। अखंड ज्योति को बुझने से बचाने के लिए कांच के लैंप से ढककर रखना चाहिए और 9 दिनों तक अखंड ज्योति जलाने के बाद उसे फूंक मारकर नहीं बुझना चाहिए। दीपक को स्वयं बुझने दें। ध्यान रहें कि, आग्रेय कोण यानी कि पूर्व-दक्षिण में अखंड ज्योति जलाना अच्छा माना जाता है।