बसंत पंचमी सनातन धर्म का खास पवित्र पर्व है। यह पर्व माता सरस्वती को समर्पित है। बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा कहा जाता है।बंसत पंचमी पर मां सरस्वती की विधिवत पूजा की जाता है।
Basant Panchami 2026 : बसंत पंचमी सनातन धर्म का खास पवित्र पर्व है। यह पर्व माता सरस्वती को समर्पित है। बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा कहा जाता है।बंसत पंचमी पर मां सरस्वती की विधिवत पूजा की जाता है। हिंदू धर्म में बसंत पंचमी को विद्या, विवेक और नई शुरुआत का पर्व माना जाता है। माता सरस्वती को ज्ञान, वाणी, बुद्धि, कला, संगीत और ध्वनि की देवी माना जाता है। यह दिन हर छात्र के लिए विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि यदि इस दिन छात्र माता की आराधना के साथ कुछ खास वास्तु उपाय करें, तो पूजा का प्रभाव बढ़ जाता है। साथ ही शिक्षा और कार्य क्षेत्र में उन्नति मिलने की संभावना भी बढ़ती है। इस बार बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त प्रातः 07.15 बजे से लेकर दोपहर 12.50 बजे तक बताया गया है।
माता सरस्वती की तस्वीर
जहां आप पढ़ाई करते हैं, यानी स्टडी रूम में, बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की एक तस्वीर लगाएं।
पीले रंग के फूल
माना जाता है कि माता सरस्वती को पीले रंग के फूल अत्यंत प्रिय होते हैं। ऐसे में बसंत पंचमी के दिन अपने घर और स्टडी रूम में पीले रंग के फूल अवश्य रखें। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
किताब और पेन
वास्तु शास्त्र के अनुसार, छात्रों को इस दिन अपनी किताबें और कलम पूजा स्थल पर रखनी चाहिए। साथ ही माता सरस्वती के मंत्र- “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” का 21 बार जाप करना चाहिए. इससे एकाग्रता बढ़ती है और पढ़ाई में मन लगता है.साथ ही याद करने की क्षमता बढ़ती है।
मंत्र का जप
नमस्ते शारदे देवी, काश्मीरपुर वासिनी,
त्वामहं प्रार्थये नित्यं, विद्या दानं च देहि में,
कंबू कंठी सुताम्रोष्ठी सर्वाभरणंभूषिता,
महासरस्वती देवी, जिव्हाग्रे सन्नी विश्यताम् ।।
शारदायै नमस्तुभ्यं , मम ह्रदय प्रवेशिनी,
परीक्षायां समुत्तीर्णं, सर्व विषय नाम यथा
दीपक जलाएं
बसंत पंचमी के दिन घर के उत्तर या पूर्व दिशा में दीपक जलाएं। ऐसा करने से ध्यान भटकने की समस्या कम होती है और एकाग्रता बढ़ती है।